जयशंकर की कूटनीति सफल, होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय टैंकरों को मिला सुरक्षित रास्ता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा सहारा मिला है.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दे दी है.
इस कूटनीतिक पहल का उद्देश्य भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बिना बाधा जारी रखना था. सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली ने क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और समुद्री मार्गों में संभावित व्यवधान को देखते हुए अपने ऊर्जा आयात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से राजनयिक प्रयास किए.
कूटनीतिक बातचीत के बाद भारत को राहत
सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी. गुरुवार को हुई इस बातचीत को नई दिल्ली की मध्य पूर्व कूटनीति की अहम सफलता माना जा रहा है.
इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना था, ताकि कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो.
दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. दुनिया भर में भेजे जाने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है.
क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण जहाजरानी में व्यवधान की आशंका को देखते हुए भारत ने तुरंत कूटनीतिक कदम उठाए. सूत्रों के मुताबिक, वार्ता का उद्देश्य भारतीय जहाजों के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखना था ताकि कच्चे तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रह सके.
ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत के लिए अहम है खाड़ी क्षेत्र
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र के समुद्री परिवहन मार्गों में स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस मार्ग का उपयोग जारी रखने की अनुमति दे दी है, हालांकि अमेरिका, यूरोप और इज़राइल से जुड़े जहाजों को फिलहाल इस जलमार्ग में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है.
अन्य देशों से भी की गई बातचीत
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे पर अन्य प्रमुख देशों के नेताओं से भी संपर्क किया. उन्होंने रूस के सर्गेई लावरोव और फ्रांस के जीन-नोल बैरोट से क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों और मौजूदा स्थिति पर चर्चा की.
आईआरजीसी ने दी थी जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी
इस महीने की शुरुआत में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, संगठन ने चेतावनी दी थी कि रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने का प्रयास करने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है.
इस बयान से ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव में और ज्यादा तनाव पैदा हो गया.
क्षेत्रीय संघर्ष से बढ़ा तनाव
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की कथित तौर पर हत्या होने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया. इसके चलते पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई.
ऊर्जा संकट का असर भारत में भी
अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता बढ़ी है. इससे भारत में व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है और आतिथ्य उद्योग पर इसका सीधा असर पड़ा है.
बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई जैसे शहरों में कई रेस्तरां ने चेतावनी दी है कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने पर उन्हें बंद करना पड़ सकता है. उद्योग संगठनों का कहना है कि रविवार से ही आपूर्ति प्रभावित है, जिससे कई प्रतिष्ठानों के संचालन में मुश्किलें आ रही हैं.
मुंबई में लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्तरां बंद होने की खबर है, जबकि चेन्नई होटल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है.
एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी
7 मार्च को पूरे भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की गई. 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये का इजाफा हुआ, जबकि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमत करीब 115 रुपये बढ़ गई.
आपूर्ति में कमी के कारण कुछ स्थानों पर एलपीजी की कालाबाजारी भी शुरू हो गई, जहां लोगों को एक सिलेंडर के लिए 2,000 से 2,500 रुपये तक चुकाने पड़े.
अफवाहों पर नजर रखने के निर्देश
भारत को होर्मुज से राहत मिलने से कुछ घंटे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों को एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी अफवाहों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए थे.
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे को उठाया और मंत्रियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों पर फैलाए जा रहे भ्रामक संदेशों का जवाब दें.
खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा चुनौतियां वैश्विक घटनाक्रमों का परिणाम हैं और यह केवल भारत तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसी भी तरह की बाधा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.


