होर्मुज में दिखा अनोखा नजारा, बेहद करीब आए भारत-पाक की नौसेनाएं

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज के पास एक चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला, जहां भारत और पाकिस्तान की नौसेनाएं बेहद कम दूरी पर सक्रिय नजर आईं. दोनों देश अपने-अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में जुटे हैं, जिससे क्षेत्र में रणनीतिक हलचल तेज हो गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं. इसी बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया है जिसने वैश्विक रणनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है -भारत और पाकिस्तान की नौसेनाएं बेहद कम दूरी पर एक साथ सक्रिय नजर आईं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमान के तट के पास दोनों देशों के युद्धपोत एक-दूसरे से महज कुछ समुद्री मील की दूरी पर तैनात थे. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है.

होर्मुज के पास भारत-पाक नौसेनाएं आमने-सामने

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन ने इस दुर्लभ घटना की जानकारी दी. उन्होंने एक्स पर लिखा, "अभी हाल ही में एक अनोखी चीज देखने को मिलीः ओमान के तट के पास भारत और पाकिस्तान के नौसेना जहाज एक-दूसरे से सिर्फ 18 समुद्री मील की दूरी पर मौजूद हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रही जंग के बीच दोनों देश अपने-अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं."

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना अलर्ट

सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए समुद्री मार्गों पर अपनी मौजूदगी मजबूत कर दी है. इसके तहत भारत आने वाले एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल के जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है.

मार्च में एक अधिकारी ने बताया था, "हम फारस की खाड़ी और होर्मुज से लेकर अरब सागर तक जहाजों को सुरक्षा दे रहे हैं और उन्हें सही रास्ता दिखाने में मदद कर रहे हैं, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी यात्रा पूरी कर सकें."

उन्होंने यह भी कहा था कि युद्धपोत तनावपूर्ण इलाकों से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. अनुमान है कि फिलहाल भारत के 10 से अधिक जहाज होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं.

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म होने की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन परमाणु मुद्दे पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटे, जबकि ईरान पूरी तरह से ऐसा करने को तैयार नहीं दिख रहा.

ईरानी सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्ष मतभेदों को दूर करने और होर्मुज को लेकर सहमति बनाने के रास्ते तलाश रहे हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ईरान लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से राहत चाहता है.

सूत्रों के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका को प्रस्ताव दिया है कि वह ओमान की ओर से गुजरने वाले जहाजों को बिना किसी हमले के सुरक्षित मार्ग देगा, लेकिन इसके लिए एक ठोस समझौता जरूरी होगा.

ट्रंप का बयान: समझौते पर खुद हो सकते हैं शामिल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हो रही है. उन्होंने संकेत दिया कि अगर शांति समझौता होता है तो वह खुद इसमें शामिल हो सकते हैं.

ट्रंप ने कहा, "अगर इस्लामाबाद में समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो मैं जा सकता हूं."

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