लोकसभा में 67, राज्यसभा में 21 वोट की जरूरत, महिला आरक्षण बिल का गणित समझिए

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा, जो परिसीमन और जनगणना से जुड़ा है. केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कर महिला आरक्षण जल्द लागू करने की तैयारी में है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

संसद के विशेष सत्र में आज तीन महत्वपूर्ण विधेयक एक साथ पेश किए जाने वाले हैं. सरकार का मुख्य लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और परिसीमन की प्रक्रिया को पूरा करना है. इसके तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. साथ ही परिसीमन आयोग के गठन और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला आरक्षण लागू करने संबंधी विधेयक भी लाए जा रहे हैं. इन विधेयकों के पारित होने के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नया आयाम मिलने की उम्मीद है.

विशेष सत्र का उद्देश्य

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर महिला आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है.

कैसे पास होंगे विधेयक? जानें नंबर गेम

परिसीमन विधेयक को छोड़कर बाकी दोनों विधेयक संविधान संशोधन हैं. इन्हें पास करने के लिए संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी. 

लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 है. NDA के पास फिलहाल 293 सदस्य हैं, यानी उसे अभी भी 67 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है. राज्यसभा में जादुई आंकड़ा 163 है, जबकि NDA की ताकत करीब 142 के आसपास है. ऐसे में उसे 21 और वोटों की दरकार है. विपक्ष के वॉकआउट से बहुमत का आंकड़ा और कम हो सकता है.

विपक्ष का रुख

विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन सरकार द्वारा इसे परिसीमन और 2029 के चुनावों से जोड़ने के कारण वे इन विधेयकों का विरोध करने को मजबूर हैं.

क्षेत्रीय संतुलन को लेकर चिंता

विपक्ष का तर्क है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण केवल NDA को फायदा पहुंचाएगा. इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की संसदीय शक्ति कम हो सकती है और वे हाशिए पर चले जाएंगे.

राहुल गांधी का आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि सरकार की योजना 2029 के लिए सीटों का अपनी सुविधानुसार सीमाओं में बदलाव करने की है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक सुरक्षा उपायों को हटाकर पूरी शक्ति सरकार द्वारा नियुक्त आयोग को देता है.

लोकसभा सीटों में भारी बढ़ोतरी

प्रस्तावित विधेयकों के अनुसार परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 815 तक हो सकती है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं. वर्तमान में राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य चुने जाते हैं.

क्षेत्रीय दलों का बदलता रुख

बीजेडी और बीआरएस जैसे क्षेत्रीय दल अक्सर मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने अपना रुख कड़ा कर लिया है. इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

सरकार का भरोसा

तमाम विरोधों के बावजूद सरकार का दावा है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कोई भी दल सिद्धांत रूप में महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है और इस भावना के साथ सभी एक साथ हैं.

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