कांग्रेस को RSS की तारीफ क्यों करनी पड़ी? शिवसेना नेता ने खोल दी पोल

मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले राजनीति गरमा रही है. धीरे-धीरे शिवसेना और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातचीत ठप पड़ गई है. बढ़ती दूरियों के बीच शिवसेना के एक नेता ने कांग्रेस को नसीहत दी है.

Sonee Srivastav

महाराष्ट्र: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले महाविकास अघाड़ी में दरारें साफ नजर आ रही हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातचीत ठप पड़ गई है. इसी बीच शिवसेना के एक नेता ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संगठनात्मक अनुशासन और समर्पण सीखे. इस सलाह में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम भी जोड़ा गया, जिन्होंने हाल ही में RSS की संगठन शक्ति की सराहना की थी.

शिवसेना की तीखी सलाह

शिवसेना के प्रवक्ता ने कहा कि RSS देशभर में लाखों स्वयंसेवकों के जरिए सेवा कार्य करता है. हालांकि वह सीधे राजनीति में नहीं आता, लेकिन पीछे से समर्थन देता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि RSS का अनुशासन, देश के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक विरासत को संभालने का तरीका बेहद प्रशंसनीय है. ऐसे संगठन से कांग्रेस को सीख लेनी चाहिए. उन्होंने दिग्विजय सिंह का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुद RSS की तारीफ कर रहे हैं.

अगर कांग्रेस RSS से नहीं सीखेगी तो क्या अपनी ही पार्टी से सीखेगी, जहां अनुशासन और रणनीति की कमी साफ दिखती है. पार्टी में बैठकें, गठबंधन और फैसले सब अनिश्चितता में डूबे रहते हैं. 

RSS को बताया आदर्श संगठन

शिवसेना नेता ने RSS की जमकर प्रशंसा की. उनके मुताबिक, यह संगठन देश की परंपराओं और धरोहर को जीवंत रखता है. इतनी मजबूत संगठन शक्ति कि एक साधारण कार्यकर्ता को प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा सकती है. हिंदुत्व के बड़े आंदोलनों में RSS हमेशा आगे रहता है. शिवसेना के कई अभियानों में भी RSS का साथ मिला है. ऐसे में कांग्रेस को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए. 

दिग्विजय सिंह का विवादित बयान

दिग्विजय सिंह ने हाल में एक पुरानी तस्वीर शेयर की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वरिष्ठ नेता के सामने जमीन पर बैठे दिख रहे थे. उन्होंने लिखा कि यह RSS की संगठन शक्ति का उदाहरण है, जहां जमीनी कार्यकर्ता बड़े पदों तक पहुंचता है. विवाद होने पर सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ संगठन की ताकत की तारीफ की है, विचारधारा या नीतियों की नहीं. वह RSS और वर्तमान सरकार के विरोधी हैं और रहेंगे. 

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