कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली अग्रिम जमानत, CM हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दायर की गई मानहानि मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है. खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है.

नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस के दर्ज मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी. यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भुइयां से जुड़े आरोपों पर आधारित है.
क्या है पूरा मामला?
पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी अघोषित संपत्ति है. इन बयानों के बाद असम पुलिस ने उनके खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया. खेड़ा का कहना है कि उनके बयान राजनीतिक संदर्भ में थे और FIR राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज की गई.
गुवाहाटी हाई कोर्ट का फैसला
इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल को खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा कि खेड़ा ने एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा है.
हाई कोर्ट के अनुसार, दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है. अदालत ने यह भी कहा कि यह साधारण मानहानि का मामला नहीं है और आरोपों को साबित करना अभी बाकी है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और दलीलें
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि मामले की परिस्थितियां राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की ओर इशारा करती है. इसलिए खेड़ा की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है.
सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह राजनीतिक मामला है. उन्होंने असम मुख्यमंत्री की कुछ टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि अगर खेड़ा गिरफ्तार हुए तो उनके साथ उचित व्यवहार नहीं हो सकता. सिंघवी ने मुख्यमंत्री की तुलना "संवैधानिक काउबॉय" या "रैम्बो" से की और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) की रक्षा की मांग की.
असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि खेड़ा ने फर्जी और छेड़छाड़ वाले दस्तावेज पेश किए हैं. उन्होंने हिरासत में पूछताछ की जरूरत पर जोर दिया ताकि दस्तावेजों के स्रोत और अन्य संभावित लोगों का पता लगाया जा सके.
घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन
7 अप्रैल: असम पुलिस दिल्ली में खेड़ा के घर पहुंची.
10 अप्रैल: तेलंगाना हाई कोर्ट से ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली.
15-17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट बेल पर रोक लगाई और गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने को कहा.
24 अप्रैल: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की.
30 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी.


