जंग समाप्त होने के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट का संकट बरकरार, तेल-LPG आयात पर नई मुसीबत, भारत चिंतित

पश्चिम एशिया में युद्ध की आग भड़क उठी है, जिसकी लपटें एशिया से यूरोप तक फैलने लगी हैं. होर्मुज स्ट्रेट के एनर्जी कॉरिडोर से तेल-गैस की आपूर्ति अभी भी ठप पड़ी है. ईरान पूरी कोशिश कर रहा है कि जहाज न गुजरें, ताकि उसकी मांगें सुनी जाएं. इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका की दूसरी दौर की बातचीत भी फंस गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले इस जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से एशिया से यूरोप तक के देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है. ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बार्गेनिंग चिप की तरह इस्तेमाल कर रहा है. अब अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है.पेंटागन के अनुसार, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में समुद्री माइंस बिछा दिए हैं. युद्ध समाप्त होने के बाद इन माइंस को पूरी तरह साफ करने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है. भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी रूट पर निर्भर है, इसलिए यह नया खतरा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

पेंटागन का चौंकाने वाला खुलासा

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में हाल ही में हुई एक गोपनीय ब्रीफिंग ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि ईरान के साथ जारी युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित और साफ करने में छह महीने तक का समय लग सकता है. यह आकलन खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे अमेरिकी संसद की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्यों के साथ साझा किया गया.

ब्रीफिंग में बताया गया कि ईरान ने इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में बड़ी संख्या में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई हो सकती हैं. अनुमान है कि इनकी संख्या 20 या उससे अधिक हो सकती है. कुछ माइंस को GPS तकनीक से दूर से नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया है, जिससे उन्हें ढूंढना और निष्क्रिय करना और भी मुश्किल हो गया है. कुछ को ईरानी नौकाओं के जरिए सीधे समुद्र में बिछाया गया.

क्या छह महीने तक बंद रहेगा होर्मुज स्ट्रेट?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इन रिपोर्टों पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि छह महीने तक होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने का आकलन असंभव और अस्वीकार्य है. उन्होंने कहा कि किसी एक खुफिया आकलन को अंतिम सत्य मान लेना सही नहीं होगा और मीडिया द्वारा लीक जानकारी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.

खतरनाक आर्थिक प्रभाव

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांसपोर्टिंग रूट्स में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा. अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं.

सफाई और सुरक्षा अभियान तब तक शुरू नहीं किया जा सकता जब तक अमेरिका और इजराइल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध समाप्त नहीं हो जाता. यानी संघर्ष जितना लंबा चलेगा, आर्थिक असर भी उतना ही गहरा होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को लेकर स्पष्ट किया है कि इसके खत्म होने की कोई तय समयसीमा नहीं है. उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा.

पेंटागन और व्हाइट हाउस लगातार यह दावा कर रहे हैं कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं.

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