Iran-US Peace Talks Fail: 21 घंटे की चर्चा के बाद भी नहीं निकला हल, ये रहीं बड़ी वजहें

ईरान और अमेरिका के बीच हाई-लेवल शांति बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे की बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए, जिससे इलाके में तनाव कम होने की उम्मीदें खत्म हो गईं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली इस लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है.

अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस ने वार्ता खत्म होने की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका ने अपना अंतिम प्रस्ताव सामने रख दिया है और अब फैसला ईरान को लेना है. यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिका ने हाल ही में इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमलों को दो हफ्तों के लिए रोकने की घोषणा की थी, ताकि बातचीत का रास्ता खुल सके.

परमाणु हथियार बना सबसे बड़ा विवाद

इस्लामाबाद के एक लग्जरी होटल में मीडिया से बातचीत करते हुए वेंस ने स्पष्ट किया कि वार्ता की सबसे बड़ी बाधा परमाणु हथियारों का मुद्दा रहा. अमेरिका चाहता है कि ईरान न सिर्फ अभी बल्कि भविष्य में भी परमाणु हथियार विकसित न करने की ठोस गारंटी दे.

वेंस ने कहा,"सीधी सी बात यह है कि हमें एक सकारात्मक आश्वासन चाहिए कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे और न ही उन उपकरणों को हासिल करने की कोशिश करेंगे जिससे भविष्य में तेजी से बम बनाया जा सके. सवाल यह है कि क्या हम ईरानियों में परमाणु हथियार न बनाने की दृढ़ इच्छाशक्ति देखते हैं? अभी तक हमें ऐसा कुछ नहीं दिखा है, लेकिन हमें उम्मीद है कि भविष्य में दिखेगा."

अमेरिका की सख्त मांगें

सरकार समर्थक इन्फ्लुएंसर अली घोलहकी के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान से 400 किलोग्राम यूरेनियम देश से बाहर भेजने की मांग की है. यह वही स्टॉक बताया जा रहा है जिसे पिछले सैन्य अभियान में जब्त नहीं किया जा सका था.

इसके अलावा अमेरिका ने जीरो एनरिचमेंट और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर भी शर्तें रखी हैं. अली घोलहाकी ने X पर लिखा,"आज स्ट्रेट पर एक टेस्ट हुआ, जिसे ईरान ने साफ तौर पर ठुकरा दिया. लेबनान को लेकर US की तरफ से कोई कमिटमेंट नहीं मिला, जिससे यह साफ होता है कि वॉशिंगटन असल में बातचीत करने के लिए नहीं आया था."

ईरान का जवाब: 'अत्यधिक मांगें'

वार्ता के विफल होने पर तेहरान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने जरूरत से ज्यादा कड़ी शर्तें रख दी थीं, जिसके चलते सहमति संभव नहीं हो सकी.

ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अमेरिका और इजरायल इस पर भरोसा नहीं जताते. इसी अविश्वास के कारण पहले भी दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव देखने को मिला है.

ट्रंप के निर्देश और वेंस का बयान

वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के अनुसार अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने पूरी ईमानदारी और लचीलेपन के साथ बातचीत की.

उन्होंने कहा,"राष्ट्रपति ने हमसे कहा था कि हमें पूरी ईमानदारी के साथ प्रयास करना चाहिए. हमने वही किया, लेकिन दुर्भाग्य से हम कोई खास प्रगति नहीं कर पाए."

होर्मुज जैसे अहम मुद्दों पर चुप्पी

हालांकि बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन वेंस ने अपने बयान में Strait of Hormuz को लेकर किसी भी मतभेद का जिक्र नहीं किया.

यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है.

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