पाकिस्तान मध्यस्थता से हुआ गायब! ट्रंप ने ईरान से खुद फोन पर की बात, पुतिन से भी हुई 90 मिनट बात

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में पकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह नाकाम साबित हुई. ईरान ने साफ-साफ भरोसा करने से इनकार कर दिया है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह नाकाम साबित हुई. ईरान ने पाकिस्तान पर भरोसा करने से इनकार कर दिया है. अब पाकिस्तान इस भूमिका से पूरी तरह गायब नजर आ रहा है. दोनों देश अब सीधे फोन पर बातचीत कर रहे हैं.

ट्रंप का सीधा रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब पाकिस्तान के जरिए बात करने की बजाय ईरान से सीधे फोन पर संपर्क बेहतर विकल्प है. ट्रंप के अनुसार ईरान के साथ हाल की बातचीत पहले से काफी बेहतर रही है. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा.

ट्रंप-पुतिन के बीच लंबी बातचीत

ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बात की. यह बातचीत 90 मिनट से ज्यादा समय तक चली. क्रेमलिन ने इसे दोस्ताना और उपयोगी बताया. दोनों नेताओं ने ईरान संकट, यूक्रेन विवाद और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की. पुतिन ने ईरान मुद्दे पर कुछ सुझाव भी दिए.

ईरान ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल

ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने कहा कि पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में भरोसे के योग्य नहीं रहा क्योंकि वह अमेरिका के सामने झुक जाता है. हालांकि उन्होंने पाकिस्तान को अच्छा पड़ोसी और मित्र बताया, लेकिन मध्यस्थता के लिए अनुपयुक्त करार दिया. रेजाई का आरोप है कि पाकिस्तान अक्सर ट्रंप के हितों का समर्थन करता है और अमेरिका के खिलाफ मजबूत रुख नहीं अपनाता.

भारत से ईरान की बातचीत

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से फोन पर बात की. दोनों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति, सीजफायर के हालात, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भारत को विस्तार से जानकारी दी. दोनों पक्षों ने भविष्य में संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई.

फिलहाल पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल होने के बाद अब अमेरिका ईरान से सीधी बातचीत पर जोर दे रहा है. ट्रंप ने दोहराया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर कर दी गई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन मुद्दा अभी भी जटिल बना हुआ है.

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