US ईरान में उलझा, चीन ने भेड़िए की तरह घेराबंदी कर दी, 19 फाइटर जेट और 9 जहाजों से ताइवान को डराया

अमेरिका के ईरान से उलझे रहने का फायदा उठाते हुए चीन ने ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं. 19 लड़ाकू विमान और कई युद्धपोत तैनात किए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ताइवान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से जारी युद्ध ने वैश्विक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है. इस संघर्ष में अमेरिका के उलझे होने का सबसे बड़ा फायदा चीन उठा रहा है. ताइवान अब अकेला पड़ गया है और चीन ने चुपचाप ताइवान पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ताइवान पर हमले की पूरी तैयारी कर चुका है.

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार सुबह तक की जानकारी देते हुए बताया कि चीन के 19 सैन्य विमान, 9 नौसैनिक जहाज और 2 सरकारी जहाज ताइवान के आसपास सक्रिय पाए गए. इनमें से 13 लड़ाकू विमान ताइवान स्ट्रेट की मिडियन लाइन पार कर उसके एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में घुस आए.

चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां

इससे एक दिन पहले भी चीन ने 13 सैन्य विमान तैनात किए थे, जिनमें से 11 ने मिडियन लाइन पार की थी. ये सभी विमान संयुक्त हवाई और समुद्री अभ्यास में शामिल थे. ताइवान की सेना ने इन गतिविधियों पर सतर्क नजर रखी और जरूरी जवाबी तैयारी भी की. ये घटनाएं ठीक उसी समय हो रही हैं जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए ताइवान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है.

चीन-ताइवान विवाद की जड़

चीन लंबे समय से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश के रूप में देखता है. यही विवाद दोनों के बीच सबसे बड़ा टकराव का कारण बना हुआ है. चीन बार-बार संकेत दे चुका है कि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य विकल्प भी अपना सकता है.

ईरान मुद्दे पर चीन का शांत रुख

दिलचस्प बात यह है कि ईरान के साथ चीन के अच्छे संबंध हैं, लेकिन अमेरिकी हमलों के बावजूद चीन का रुख काफी शांत रहा. उसने सिर्फ बयानबाजी तक खुद को सीमित रखा और ईरान को कोई ठोस सैन्य समर्थन नहीं दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की प्राथमिकता फिलहाल ताइवान है. वह ईरान मामले में सीधे दखल नहीं दे रहा ताकि अमेरिका भी ताइवान से दूर रहे.

शी जिनपिंग का साफ संदेश 

एक रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ बातचीत में ताइवान को सबसे बड़ा मुद्दा बताया था. उन्होंने साफ कहा था कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और इस पर किसी भी तरह की बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.  चीन फिलहाल सीधे टकराव से बचते हुए ‘प्रेशर बिल्ड-अप’ की रणनीति पर काम कर रहा है. लगातार सैन्य गतिविधियों के जरिए ताइवान और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बनाया जा रहा है.

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