ईरान में घुसकर 400 किलो यूरेनियम चुराने की अमेरिका की साजिश, युद्ध नहीं अब महायुद्ध की तैयारी

चीन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर कोरिया के लिए अपनी विमान सेवा छह साल बाद फिर से शुरू कर दी है. कोरोना महामारी के दौरान लगी रोक के बाद अब दोनों देशों के बीच हवाई यात्रा दोबारा बहाल हो गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

अमेरिका-ईरान तनाव अब जमीनी हमले की दहलीज पर पहुंच गया है. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग 31 दिन पूरे कर चुकी है और इस बीच अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर संभावित जमीनी ऑपरेशन की अटकलें तेज हो गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती ने इन अटकलों को और बल दिया है. ट्रंप ईरान में छिपाए गए 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को निकालने का आदेश दे सकते हैं. अमेरिका को आशंका है कि ईरान इस यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है.

ट्रंप का प्लान क्या है?

अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है. ट्रंप साफ तौर पर कह चुके हैं कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. योजना के तहत अमेरिका ईरान की परमाणु सुविधाओं से लगभग 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम निकालना चाहता है, जिसे ईरान ने दबाकर रखा हुआ है. अभी इस ऑपरेशन को शुरू करने का अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

ऑपरेशन कितना जोखिम भरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका यह सैन्य अभियान शुरू करता है तो यह काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है. अमेरिकी सेना को कई दिनों या उससे भी ज्यादा समय तक ईरान में रहकर यह काम पूरा करना पड़ सकता है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप अमेरिकी सैनिकों को होने वाले रिस्क को ध्यान में रख रहे हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे इस ऑपरेशन के लिए तैयार हैं.

ट्रंप का खार्ग द्वीप और तेल पर बड़ा बयान 

मीडिया को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे ईरान का तेल लेना चाहते हैं और तेहरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा कर सकते हैं. ट्रंप ने कहा, हो सकता है हम खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लें, हो सकता है न करें. हमारे पास कई विकल्प हैं. उन्होंने आगे कहा, इसका मतलब यह भी होगा कि हमें कुछ समय के लिए वहां खारग द्वीप में रहना होगा. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि खार्ग द्वीप पर ईरान की सुरक्षा व्यवस्था बहुत कम या लगभग न के बराबर है.

मीडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती

पेंटागन मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका 10,000 तक अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की तैयारी में है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को घोषणा की कि 2,500 मरीन सहित 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही मिडिल ईस्ट में पहुंच चुके हैं.

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