अगली बारी बंगाल की...BJP के बयान पर भड़की ममता बनर्जी, बोली- यह बिहार नहीं है
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के बाद बीजेपी नेताओं ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार को चुनौती देने की बात की है. तृणमूल कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि बिहार और बंगाल की राजनीति अलग है.

पश्चिम बंगाल : बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं की महत्वाकांक्षा
बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगी दल एनडीए की प्रचंड जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के मनोबल को और बढ़ा दिया है. इस जीत के बाद बीजेपी के नेताओं ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की सरकार को हटाने का आक्रामक रूप से दावा करना शुरू कर दिया है.
भाजपा की जीत पर तृणमूल का पलटवार
आपको बता दें कि बिहार की सफलता को पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए एक संभावित जीत के रूप में देखे जाने पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बंगाली कहावत का हवाला दिया – “कौवे के लिए पके बेल का क्या काम?”
भाजपा नेताओं की टिप्पणी पर TMC का रुख
ममता बनर्जी का बंगाल में मजबूत दबदबा
टीएमसी के नेता कुणाल घोष ने भाजपा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीति और बिहार की राजनीति दोनों पूरी तरह से अलग हैं, और भाजपा का बिहार में प्राप्त सफलता का बंगाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. घोष ने यह भी कहा कि भाजपा द्वारा गढ़ी गई यह कहानी कि वह अगले चुनाव में बंगाल जीतने जा रही है, एक भ्रम है, क्योंकि बंगाल की जनता को ममता बनर्जी की सरकार पर पूरा विश्वास है और भाजपा के प्रयासों का कोई असर नहीं पड़ेगा.
बीजेपी और तृणमूल के बीच गहरी प्रतिस्पर्धा
बिहार में भाजपा की जीत ने जहां पार्टी को उत्साहित किया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे लेकर सतर्क है. दोनों पार्टीयों के बीच अब पश्चिम बंगाल में एक बड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा अपने समर्थन के लिए बंगाल की स्थानीय संस्कृति और राजनीति को प्राथमिकता दी है, जबकि भाजपा अपनी केंद्रीय राजनीति और विकास की योजनाओं के माध्यम से यहां अपनी पैठ बनाने की कोशिश करती है. आगामी चुनाव में दोनों दलों के बीच की यह लड़ाई दिलचस्प मोड़ ले सकती है.


