पश्चिम बंगाल: सुभाषनगर में मिली फेंकी हुई VVPAT पर्चियां, चुनाव आयोग ने दी सफाई
मतगणना से पहले वीवीपीएटी पर्चियों के कूड़े में मिलने से विवाद खड़ा हो गया है. चुनाव आयोग ने इसे मॉक पोल से जुड़ा बताया, जबकि विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

कोलकाता: विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की गिनती शुरू होने से ठीक पहले एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया. सोमवार को चुनाव आयोग को सफाई देनी पड़ी, जब कुछ वीवीपीएटी पर्चियां कथित तौर पर कूड़े में पड़ी मिलीं. इस घटना ने न सिर्फ राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए.
चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो वीवीपीएटी पर्चियां मिली हैं, उनका वास्तविक मतदान से कोई लेना-देना नहीं है. आयोग के अनुसार, ये पर्चियां मतदान से पहले किए गए मॉक पोल के दौरान इस्तेमाल की गई थीं.
मॉक पोल की पर्चियां होने का दावा
चुनाव आयोग ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जांच में यह सामने आया है कि बरामद वीवीपीएटी पर्चियां केवल अभ्यास के लिए की गई मॉक पोल प्रक्रिया का हिस्सा थीं. इनका चुनाव वाले दिन डाले गए असली वोटों से कोई संबंध नहीं है. आयोग ने यह भी बताया कि मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी गई है और औपचारिक शिकायत दर्ज कर ली गई है, ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके.
कहां मिलीं पर्चियां?
जानकारी के अनुसार, ये वीवीपीएटी पर्चियां नोआपारा विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 29 से जुड़ी बताई जा रही हैं. इन्हें गरुलिया इलाके में इस्तेमाल की गई ईवीएम से संबंधित माना गया है. रविवार शाम को ये पर्चियां दत्तपुकुर थाना क्षेत्र के सुभाषनगर इलाके में कूड़े के ढेर में पाई गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया. नियमों के मुताबिक, वीवीपीएटी पर्चियों को ईवीएम के साथ सुरक्षित तरीके से स्ट्रांग रूम में रखा जाना चाहिए. ऐसे में इनका बाहर मिलना कई सवाल खड़े करता है.
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
इस घटना के सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह और सीपीआई (एम) की उम्मीदवार गार्गी चटर्जी ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए.
अर्जुन सिंह ने इस मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं चुनाव की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं.
गार्गी चटर्जी का आरोप
सीपीआई (एम) उम्मीदवार गार्गी चटर्जी ने इस पूरे मामले को चुनाव आयोग की लापरवाही बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. चटर्जी ने मांग की कि मतगणना शुरू होने से पहले उन्हें संबंधित ईवीएम यूनिट दिखाई जाए. उनका कहना है कि जब तक पूरी पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक मतगणना प्रक्रिया पर भरोसा करना मुश्किल है. उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकांश वीवीपीएटी पर्चियों पर उनके पक्ष में वोट दर्ज थे.
इस घटना के बाद सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भी स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि पर्चियां बाहर मिल रही हैं, तो यह सुरक्षा में बड़ी चूक का संकेत हो सकता है. फिलहाल, चुनाव आयोग ने जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. लेकिन इस घटना ने मतगणना से पहले ही राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है.


