शेयर बाजार में गिरावट के बाद निवेश का सुनहरा मौका? विशेषज्ञों से जानें स्मार्ट स्ट्रैटजी
बाजार की मजबूती कंपनियों के मुनाफे पर टिकी है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कमाई में दहाई अंकों की जोरदार ग्रोथ देखने को मिल सकती है. जब शेयर सस्ते पड़ते हैं और मुनाफा बढ़ता है, तो वैल्यूएशन अपने आप आकर्षक हो जाती है.

भारतीय शेयर बाजार कुछ समय पहले तक काफी महंगा नजर आ रहा था, लेकिन अब एक बड़े करेक्शन के बाद निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर पैदा हो गया है. सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से हुई 20-30 प्रतिशत की गिरावट और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने बाजार को फिर से निवेश के लिहाज से अनुकूल बना दिया है. लेकिन क्यों अब बाजार सस्ता और बेहतर नजर आने लगा है. तो चलिए जानते हैं.
बाजार अब क्यों लग रहा है सस्ता और आकर्षक?
सितंबर 2024 के हाई से इंडेक्स में करीब 20-30 प्रतिशत की गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2025 थोड़ा सुस्त रहा, लेकिन 2026 की शुरुआती तीन तिमाहियों में कंपनियों की कमाई मजबूत रही है. निफ्टी 50 अब अपने लॉन्ग-टर्म औसत से करीब 10 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे बाजार अब ओवरहीटेड नहीं रह गया है.
बाजार अब क्यों लग रहा है सस्ता और आकर्षक?
सितंबर 2024 के हाई से इंडेक्स में करीब 20-30 प्रतिशत की गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2025 थोड़ा सुस्त रहा, लेकिन 2026 की शुरुआती तीन तिमाहियों में कंपनियों की कमाई मजबूत रही है. निफ्टी 50 अब अपने लॉन्ग-टर्म औसत से करीब 10 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे बाजार अब ओवरहीटेड नहीं रह गया है.
कंपनियों की कमाई का मजबूत आउटलुक
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कंपनियों की कमाई में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिल सकती है. जब शेयर की कीमत गिरती है और कंपनी का मुनाफा बढ़ता है, तो वैल्यूएशन अपने आप आकर्षक हो जाती है.
भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत
ग्लोबल तनाव के बावजूद भारत की घरेलू स्थिति मजबूत बनी हुई है. भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. महंगाई दर RBI के तय दायरे में है. खपत और क्रेडिट की रफ्तार भी स्थिर बनी हुई है.
जोखिम भी हैं, लेकिन करेक्शन हेल्दी
वैश्विक संघर्षों से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट ग्लोबल फैक्टर्स के कारण आई है, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कोई कमजोरी है. इसे ‘हेल्दी करेक्शन’ माना जा रहा है.
निवेश की रणनीति क्या हो?
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस बाजार में एक साथ पूरा पैसा न लगाएं. अपना निवेश अगले कुछ हफ्तों या महीनों में किश्तों में बांटकर करें. जो लोग पहले से SIP चला रहे हैं, उनके लिए यह गिरावट फायदेमंद है क्योंकि उन्हें कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिल रही हैं. ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, ऐसी गिरावट के बाद बाजार अक्सर 2 से 3 महीने में रिकवर कर जाता है.


