19 जगहों पर छापा, 90 अकाउंट्स सील...IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में ED का बड़ा एक्शन

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए करीब 597 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड मामले में ED ने एक्शन लेते हुए कुल 19 जगहों पर छापेमारी की. फ्रॉड से जुड़े 90 से ज्यादा बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया है.

Sonee Srivastav

चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए करीब 597 करोड़ रुपये के बड़े फ्रॉड मामले में तेज एक्शन लिया है. 12 मार्च को ईडी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकुला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में कुल 19 जगहों पर छापेमारी की. साथ ही, फ्रॉड से जुड़े 90 से ज्यादा बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया है. यह कार्रवाई हरियाणा सरकार और अन्य सरकारी संस्थाओं के फंड्स के गबन से जुड़ी है.

किन-किन जगहों पर हुई छापेमारी?

ईडी की टीम ने मुख्य रूप से बैंक के पूर्व कर्मचारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार, उनके परिवार के सदस्यों के घरों और ऑफिस पर छापा मारा. इसके अलावा फर्जी कंपनियों जैसे स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर भी सर्च हुई.

ज्वैलर्स जैसे सावन ज्वैलर्स और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वधवा की कंपनियों (प्रिस्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किंसपायर रियल्टी एलएलपी आदि) के परिसर भी जांच के दायरे में आए.

जांच में हुआ खुलासा 

जांच में पता चला कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी विभागों के अकाउंट्स में रखे फंड्स को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में रखना था, लेकिन आरोपियों ने बिना अनुमति के इन पैसों को हड़प लिया. फरवरी 2026 में पंचकुला में राज्य सतर्कता ब्यूरो की एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया.

पैसे को कई फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाया गया. स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी फर्जी कंपनी बनाकर सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया गया. उसके बाद ज्यादातर रकम ज्वैलर्स के अकाउंट्स में भेजी गई, जहां फर्जी बिलों से सोने की खरीद दिखाई गई. कुछ पैसा रियल एस्टेट में निवेश किया गया. यह धोखाधड़ी पिछले एक साल से चल रही थी.

पूर्व बैंक कर्मचारी बना मुख्य आरोपी 

पूर्व बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि जो जून 2025 में इस्तीफा दे चूका था उसे ही मुख्य आरोपी बताया गया है. उन्होंने अपनी पत्नी दिव्या अरोरा और अन्य के अकाउंट्स में पैसा ट्रांसफर किया. अभय कुमार भी शामिल थे. रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा ने भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर पैसा लिया और अपनी फर्मों में लगाया.

ईडी का मकसद मनी ट्रेल ट्रेस करना और क्राइम प्रोसीड्स जब्त करना है. फ्रीज अकाउंट्स से जांच आसान होगी. बैंक ने पहले ही प्रभावित ग्राहकों को 645 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया है. यह मामला सरकारी फंड्स की सुरक्षा और बैंकिंग सिस्टम में सख्ती की जरूरत दिखाता है. जांच जारी है और जल्द ही और एक्शन हो सकता है.

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