भारत-यूएस ट्रे़ड डील से किसानों को नहीं होगा कोई नुकसान, पीयूष गोयल बोले- अमेरिका के बाजारों में मिलेगी टैक्स फ्री एंट्री

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते से भारतीय किसानों और एमएसएमई पूरी तरह सुरक्षित रहे. संवेदनशील कृषि-डेयरी उत्पादों पर कोई छूट नहीं, जबकि कई निर्यात वस्तुओं पर टैरिफ घटकर 18% या जीरो हुआ. इससे अमेरिकी बाजार में पहुंच बढ़ी, नौकरियां बढ़ेंगी.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत ने अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौते के जरिए अपने प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल कर ली है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों और छोटे-मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की पूरी तरह रक्षा करता है. साथ ही, इससे कई भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे खुल गए हैं.

किसानों की सुरक्षा सर्वोपरि

मंत्री गोयल ने जोर देकर बताया कि भारत ने अपनी संवेदनशील कृषि और डेयरी नीतियों पर कोई समझौता नहीं किया. गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, दूध, पनीर, मुर्गीपालन, मांस और कुछ सब्जियों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है. जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) उत्पादों का आयात भी पूरी तरह रोका गया है. इससे देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. गोयल ने कहा, "मैं पूरे आत्मविश्वास से कह सकता हूं कि इस समझौते से हमारे किसानों, एमएसएमई, हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को कोई क्षति नहीं होगी."

नए बाजार के अवसर

दूसरी ओर, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जो पड़ोसी देशों से भी कम है. कई उत्पादों पर जीरो ड्यूटी लागू होगी, जैसे जेनेरिक दवाएं, रत्न-आभूषण, विमान पार्ट्स, कुछ कृषि उत्पाद (जैसे फल, नट्स, सोयाबीन ऑयल, कॉफी, मसाले), टेक्सटाइल, लेदर और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स. इससे भारतीय निर्यातकों को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी. गोयल ने बताया कि इससे एमएसएमई, किसान और मछुआरों को खास फायदा होगा, साथ ही लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए.

यह अंतरिम फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच विश्वास और गहरे संबंधों का प्रतीक है. भारत ने चुनिंदा क्षेत्रों जैसे वाइन और स्पिरिट्स में अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोला है, लेकिन अपनी मूल नीतियों पर अडिग रहा. समझौते का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. गोयल ने इसे "सुनहरे अक्षरों में लिखे जाने वाला दिन" बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की, जिससे 'मेक इन इंडिया' को नई ताकत मिलेगी.
 

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