TCS नासिक केस: पुलिस ने शुरुआती FIR में जोड़ी नई धाराएं, कंपनी ने बनाई ओवरसाइट कमेटी

नासिक में TCS से जुड़ा मामला कई गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है. कई एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस और कंपनी दोनों जांच में जुटे हैं, जबकि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग बढ़ती जा रही है.

Shraddha Mishra

महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ा मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. शुरुआत में यह मामला कुछ शिकायतों तक सीमित लग रहा था, लेकिन अब इसमें नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस की जांच गहराने के साथ इसमें यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामाजिक भेदभाव जैसे कई गंभीर आरोप जुड़ गए हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक, पहली एफआईआर में अब SC-ST अत्याचार से जुड़ी धाराएं भी जोड़ दी गई हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 मार्च को दर्ज एफआईआर नंबर 156 में अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएं भी शामिल की गई हैं. पुलिस का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने वाली महिला अनुसूचित जाति से संबंध रखती है, इसलिए कानून के तहत ये धाराएं जोड़ना जरूरी था. इस बदलाव के बाद अब जांच का दायरा और व्यापक हो गया है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और सख्त हो सकती है.

मुख्यमंत्री ने बताया गंभीर मामला

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद गंभीर है और इसमें किसी संगठित समूह की भूमिका होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस इस पूरे मामले की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और जहां जरूरत पड़ रही है, वहां केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है. मुख्यमंत्री के अनुसार, कंपनी ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जांच में पूरा सहयोग कर रही है.

अब तक की गिरफ्तारियां और फरार आरोपी

पुलिस के अनुसार, इस मामले में कई आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, लेकिन अभी भी एक आरोपी निदा खान गिरफ्तार नहीं हुई है. उसके वकील का कहना है कि वे जल्द ही अग्रिम जमानत के लिए अदालत में आवेदन करेंगे. उनका यह भी दावा है कि निदा खान के खिलाफ मीडिया में चल रही खबरें एकतरफा हैं और वह इस समय गर्भवती है, जिससे परिवार उसकी सेहत को लेकर चिंतित है.

नासिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी संदीप कार्निक ने कहा कि फिलहाल अन्य मामलों में निदा खान की भूमिका सामने नहीं आई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कंपनी में एचआर पद पर नहीं थी, बल्कि एक सामान्य कर्मचारी के तौर पर काम कर रही थी.

कुल कितनी एफआईआर दर्ज?

अब तक इस पूरे मामले में कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जो इसकी गंभीरता को दर्शाती हैं. 8 मामलों में यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, 5 मामलों में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की शिकायत दर्ज है, कम से कम 3 मामलों में यह भी कहा गया है कि शिकायत पहले कंपनी के अंदर की गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह आंकड़े बताते हैं कि मामला केवल एक या दो घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कई लोगों की शिकायतों से जुड़ा हुआ है.

आरोपियों की पृष्ठभूमि

इस मामले में शामिल कई आरोपी TCS नासिक शाखा से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं. इनमें दानिश शेख, निदा खान, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अंसारी जैसे नाम शामिल हैं, जो कंपनी में एसोसिएट पद पर काम कर रहे थे. इसके अलावा, रजा मेमन और तौसीफ अत्तार को टीम लीडर बताया गया है. वहीं पुणे से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी अश्विनी चैनानी पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की और इस तरह आरोपियों को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिला.

क्या-क्या हैं आरोप?

विभिन्न एफआईआर में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं. इनमें महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़, अश्लील हरकतें करना, आपत्तिजनक टिप्पणियां करना शामिल है. कुछ शिकायतों में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों पर धार्मिक दबाव बनाया गया. एक मामले में आरोप है कि एक व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने और खान-पान बदलने के लिए मजबूर किया गया. इसके अलावा, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने और निजी जीवन से जुड़े सवाल पूछने जैसी बातें भी सामने आई हैं, जो कार्यस्थल के माहौल को असुरक्षित बनाती हैं.

शिकायतों को नजरअंदाज करने के आरोप

कई पीड़ितों ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने पहले कंपनी के अंदर शिकायत करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया. कुछ मामलों में यह आरोप भी लगा कि वरिष्ठ अधिकारियों ने शिकायत करने वालों को चुप रहने की सलाह दी. इससे पीड़ितों में डर का माहौल बना और कई लोग खुलकर सामने नहीं आ पाए.

मुख्य आरोपियों की भूमिका

दानिश शेख: पहली एफआईआर में मुख्य आरोपी के रूप में नाम सामने आया. उस पर महिला को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप है.

तौसीफ अत्तार: कई एफआईआर में नाम दर्ज है. उस पर यौन उत्पीड़न और धार्मिक धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं.

रजा मेमन: महिला सहकर्मियों के साथ अनुचित व्यवहार और निजी जीवन में दखल देने के आरोप हैं.

निदा खान: उसका नाम सीमित मामलों में सामने आया है और उस पर धार्मिक भावनाओं से जुड़ा आरोप लगाया गया है.

कंपनी की प्रतिक्रिया और जांच

TCS ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि कंपनी में POSH कमेटी पहले से मौजूद है. कंपनी के मुताबिक, उन्हें पहले कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी. हालांकि मामला सामने आने के बाद तुरंत आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है. इसके लिए बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष हो सके. कंपनी ने डेलॉइट और ट्राइलिगल जैसी संस्थाओं की मदद ली है. साथ ही एक ओवरसाइट कमेटी भी बनाई गई है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है.

आगे की जांच और स्थिति

यह मामला अब नासिक पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है. जांच एजेंसियां हर पहलू की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह कोई संगठित पैटर्न तो नहीं है. केंद्रीय एजेंसियों की मदद से जांच को और मजबूत किया जा रहा है. वहीं कंपनी भी अपनी तरफ से हर जरूरी कदम उठा रही है.

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