बीजेपी पर वार, डीएमके को संदेश और विजय को इशारा ,राहुल का मास्टरस्ट्रोक

तमिलनाडु की राजनीति में राहुल गांधी के एक बयान ने भूचाल ला दिया है. थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के समर्थन में उतरे राहुल ने न सिर्फ बीजेपी पर वार किया, बल्कि डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों को भी नई कसौटी पर ला खड़ा किया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले ही गर्माहट तेज हो चुकी है. इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक ऐसे कदम से सियासी शतरंज की बिसात हिला दी है, जिसने सत्तारूढ़ डीएमके, उभरते नेता थलपति विजय और बीजेपी तीनों को एक साथ घेर लिया है. अभिनेता से नेता बने विजय की फिल्म 'जन नायकन' के समर्थन में राहुल का उतरना केवल सिनेमा तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है.

राहुल गांधी इस समय तमिलनाडु के दौरे पर हैं और उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनाव चरम पर है. ऐसे में राहुल का यह कदम डीएमके को सीधा संदेश देने के साथ-साथ विजय की पार्टी टीवीके के साथ भविष्य की संभावनाओं के दरवाजे भी खोलता दिख रहा है.

'जन नायकन' के बहाने राहुल का सियासी दांव

राहुल गांधी ने तमिल सुपरस्टार विजय की फिल्म 'जन नायकन' को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस फिल्म को रोकने की कोशिश करना तमिल संस्कृति पर हमला है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी "तमिल लोगों की आवाज दबाने" में सफल नहीं होंगे.

राहुल का यह बयान फिल्म के निर्माताओं द्वारा मद्रास हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के एक दिन बाद आया, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रंग लेने लगा है.

डीएमके से खींचतान और विजय का उभार

तमिलनाडु में कांग्रेस डीएमके की सहयोगी जरूर है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं. कांग्रेस 234 सदस्यीय विधानसभा में 40 सीटों की मांग कर रही है, जबकि डीएमके सिर्फ 25 से 30 सीटें देने को तैयार है.

इसी बीच कांग्रेस के भीतर एक धड़ा थलपति विजय की पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन की वकालत कर रहा है. राहुल गांधी के करीबी प्रवीण चक्रवर्ती जैसे नेता खुलकर विजय के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं.

'एक तीर से तीन निशाने' की रणनीति

राहुल गांधी के इस कदम को राजनीतिक हलकों में ‘'क तीर से तीन शिकार' के रूप में देखा जा रहा है.
पहला -विजय की फिल्म का समर्थन कर उन्होंने सीधे थलपति विजय का भरोसा जीतने की कोशिश की.
दूसरा- इससे डीएमके पर दबाव बना कि कांग्रेस के पास अब एक वैकल्पिक सहयोगी मौजूद है.
तीसरा-बीजेपी पर तमिल संस्कृति के विरोधी होने का आरोप लगाकर राहुल ने दक्षिण भारत में उसके विस्तार पर भी चोट की.

स्टालिन का सख्त रुख

डीएमके ने कांग्रेस की मांगों को अब खुलकर खारिज करना शुरू कर दिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री आई. पेरियासामी ने साफ कहा,''तमिलनाडु में कोई गठबंधन सरकार नहीं होगी. कांग्रेस को मांग रखने का अधिकार है, लेकिन सीएम एमके स्टालिन इसे मानने के इच्छुक नहीं हैं."

यह बयान कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी सत्ता में हिस्सेदारी की उम्मीद लगाए बैठी थी.

राहुल का तमिल दौरा 

पोंगल के मौके पर तमिलनाडु पहुंचे राहुल गांधी ने नीलगिरि के गुडलूर में कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उसी दौरान विजय की फिल्म का समर्थन करते हुए पोस्ट किया. उनके शब्दों में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि तमिल पहचान और संस्कृति का संदेश भी साफ झलकता है.

दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री स्टालिन भी पहले कह चुके हैं कि फिल्मों को राजनीतिक कारणों से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में यही मुद्दा दोनों सहयोगियों के बीच तनाव की वजह बन गया है.

कांग्रेस और TVK की नजदीकियां

राहुल गांधी के पोस्ट के बाद कांग्रेस और थलपति विजय की पार्टी टीवीके के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं. सोशल मीडिया पर भी दोनों की दोस्ती को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं.

विजय की टीम ने आरआरआर फिल्म का एक वीडियो शेयर कर राहुल गांधी को धन्यवाद कहा, जिसे सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

कांग्रेस दो खेमों में बंटी

कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर साफ तौर पर दो गुट बन गए हैं.एक गुट का मानना है कि डीएमके के साथ पुराने गठबंधन को बनाए रखना ही सुरक्षित और फायदेमंद है.दूसरा गुट थलपति विजय के साथ नई सियासी शुरुआत का समर्थन कर रहा है और मानता है कि उनकी लोकप्रियता कांग्रेस को नई ऊर्जा दे सकती है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag