ब्रह्मचर्य जीवन,अग्नि परीक्षा...मौत के 2 हफ्ते बाद भी रहस्य बरकरार, साध्वी प्रेम बाईसा की ID से पोस्ट करने वाले ने किया बड़ा खुलासा
राजस्थान के जोधपुर में मशहूर कथा वाचिका साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन रहस्य बरकरार है कि क्या यह सामान्य मौत थी या कोई छिपी साजिश. एसआईटी जांच कर रही है, और भोमाराम का बयान नई रोशनी डाल रहा है.

राजस्थान : जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है. 28 जनवरी की शाम को अचानक तबीयत बिगड़ने से उनका निधन हो गया, लेकिन परिस्थितियां संदिग्ध लग रही हैं. परिवार और अनुयायी न्याय की मांग कर रहे हैं. भोमाराम, जो साध्वी के इंस्टाग्राम से आखिरी पोस्ट करने वाले शख्स हैं, ने हाल ही में अपनी पूरी कहानी बताई. उनके बयान से जांच को नई दिशा मिली है, जहां फोन कॉल्स, अस्पताल की घटनाएं और सोशल मीडिया पोस्ट अहम कड़ी बनकर उभरे हैं.
फोन कॉल से अस्पताल तक की दौड़
दरअसल, भोमाराम ने बताया कि 28 जनवरी शाम 6:52 बजे साध्वी के पिता वीरमनाथ का फोन आया. उन्होंने कहा कि बाईसा की सेहत खराब है, जल्दी अस्पताल आओ. भोमाराम बाहर जाने की तैयारी में थे, लेकिन कॉल सुनते ही सब छोड़कर दौड़े. शाम 7:31 बजे अस्पताल पहुंचे, तो पता चला कि साध्वी का निधन हो चुका है. शरीर ढका था, और वीरमनाथ सदमे में थे.
अस्पताल से आश्रम का सफर
अस्पताल में पहुंचते ही भोमाराम ने संतों और परिचितों को फोन किए. वीरमनाथ ने भी कई लोगों को सूचित किया. फैसला हुआ कि आगे की कार्रवाई संत समाज की सलाह से होगी, जिसमें पोस्टमॉर्टम का मुद्दा भी शामिल था. शाम साढ़े आठ बजे अस्पताल से निकले और रास्ते में 15-20 मिनट रुके, जहां अन्य संत जुटने लगे. इस दौरान लगातार कॉल्स और मैसेज चलते रहे.
इंस्टाग्राम पोस्ट का रहस्य
सबसे विवादित हिस्सा साध्वी के इंस्टाग्राम से 'न्याय' वाली पोस्ट थी. भोमाराम बोले, मैंने पोस्ट की, लेकिन शब्द वीरमनाथ के थे. रात 9:38 बजे पोस्ट डाली गई. इसमें साध्वी के ब्रह्मचर्य जीवन और बदनामी के प्रयासों का जिक्र था. वीरमनाथ ने बताया कि साध्वी ने शंकराचार्य को पत्र लिखा था और अग्नि परीक्षा की बात की थी. पोस्ट वायरल होते ही माहौल गरमाया.
पोस्ट के बाद आश्रम में जुटती भीड़
पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर हलचल मची और आश्रम में लोग इकट्ठा होने लगे. पहले कुछ वाहन आए, फिर संख्या बढ़ी. कुछ युवकों ने नारे लगाए और वाहनों पर हमला करने की कोशिश की, जैसे हैंडल तोड़ना और टायर पंक्चर करना. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस आई और काबू किया. भोमाराम कहते हैं, वीरमनाथ शुरू से पोस्टमॉर्टम के पक्ष में थे, लेकिन संतों की राय के बाद.
एसआईटी कर रही पूरे मामले की जांच
एसआईटी अब मामले की तह तक जा रही है. भोमाराम को बुलाकर बयान लिया गया, जहां टाइमलाइन, कॉल्स और कैमरा फुटेज चेक किए. वे कहते हैं, साध्वी के सोशल मीडिया का ऐक्सेस स्टाफ के पास था, और वे नियमित नहीं संभालते. भोमाराम का पुराना जुड़ाव आश्रम से है, लेकिन इलाज की डिटेल्स उन्हें नहीं पता. मौत प्राकृतिक थी या नहीं, यह जांच से पता चलेगा, लेकिन न्याय की मांग जारी है.


