धर्मांतरण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला, ईसाई बनते ही अनुसूचित जाति का स्टेटस खत्म हो जाएगा
सुप्रीम कोर्ट ने एक रोचक और स्पष्ट फैसला सुनाया है: हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले ही अनुसूचित जाति का दर्जा पा सकते हैं. इन तीनों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को SC सदस्य नहीं माना जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति के दर्जे को लेकर देशभर में चर्चित एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने मंगलवार को स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने से अनुसूचित जाति का दर्जा अपने आप समाप्त हो जाता है. इस फैसले से SC आरक्षण से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर असर पड़ने की संभावना है.
सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला
जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय पर क्लॉज 3 में बताए गए धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म को मानने या उसका पालन करने का दावा नहीं कर सकता और साथ ही अनुसूचित जाति का सदस्य होने का दावा भी नहीं कर सकता.
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पुराने फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है. उस फैसले में कहा गया था कि जो लोग ईसाई धर्म अपना लेते हैं और सक्रिय रूप से उसका पालन करते हैं, वे अपना अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा बरकरार नहीं रख सकते.
तीन शर्तों का साबित होना जरूरी
लॉ के मुताबिक, अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि उसने संवैधानिक आदेश के क्लॉज 3 में न बताए गए किसी धर्म से वापस हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में धर्मांतरण किया है, तो तीन शर्तों का एक साथ और पूरी तरह से साबित होना जरूरी है. कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि क्लॉज 3 में न बताए गए किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर, जन्म की स्थिति चाहे जो भी हो, धर्मांतरण के उसी पल से अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह से खत्म हो जाता है.


