शादी के न्योते से मचा सियासी तूफान, सपा में खुली बगावत की दरार, मामला सीधे अखिलेश यादव तक पहुंचा

मुरादाबाद की एक शादी ने समाजवादी पार्टी में ऐसा भूचाल ला दिया कि मामला सीधे अखिलेश यादव तक पहुंच गया और अब पूरे संगठन को सख्त संदेश मिला है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मुरादाबाद में एक शादी का न्योता अचानक राजनीति की चिंगारी बन गया।डॉ एसटी हसन की बेटी की शादी किसने अटेंड की यह मुद्दा बन गया।पार्टी के भीतर से ही सवाल उठने लगे।सोशल मीडिया पर बयान तीर की तरह चलने लगे।हर पोस्ट पार्टी की छवि पर चोट कर रही थी।कार्यकर्ता असमंजस में पड़ गए।मामला धीरे धीरे लखनऊ तक पहुंच गया।

क्या नेताओं ने मर्यादा की रेखा लांघ दी?

कुछ नेताओं ने एक दूसरे पर सीधे आरोप लगाए।किसी ने कहा कि बुलावा पक्षपाती था।किसी ने कहा बीजेपी नेताओं को बुलाना गलत था।बात निजी खुशी से निकल कर राजनीतिक शक में बदल गई।पार्टी की अंदरूनी एकता कमजोर दिखने लगी।कार्यकर्ताओं में भ्रम फैल गया।जनता के बीच भी गलत संदेश गया।

अखिलेश यादव को दखल क्यों देना पड़ा?

जब विवाद बहुत बढ़ गया तो खबर सीधे पार्टी अध्यक्ष तक पहुंची।अखिलेश यादव ने स्थिति पर नाराजगी जताई।सूत्रों के अनुसार उन्होंने सख्त शब्दों में फटकार लगाई।नेताओं को अनुशासन की याद दिलाई गई।कहा गया कि ऐसे झगड़े चुनावी नुकसान कर सकते हैं।तुरंत नियंत्रण जरूरी माना गया।इसके बाद जिला स्तर पर आदेश जारी हुए।

जिलाध्यक्ष ने कौन सी सख्त गाइडलाइन दी?

जिलाध्यक्ष जयवीर यादव ने साफ कहा कि बयानबाजी तुरंत बंद होनी चाहिए।सोशल मीडिया पर आरोप प्रत्यारोप को गलत बताया गया।पार्टी के पोस्टर बैनर और फ्लैक्सी पर भी नियम तय कर दिए गए।हर प्रचार सामग्री में जिले के सांसद और विधायक का फोटो जरूरी होगा।कोई भी नेता अपनी मर्जी से प्रचार नहीं करेगा।पार्टी की छवि सबसे पहले होगी।उल्लंघन पर कार्रवाई तय है।

डॉ एसटी हसन ने क्या सफाई दी?

डॉ एसटी हसन ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया।उन्होंने कहा कि शादी में हर दल के लोगों को बुलाया गया था।जो उनसे मोहब्बत करते हैं वे बेटी को आशीर्वाद देने आए।उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बुलावे का भी जिक्र किया।अपने राजनीतिक सफर में कई नेताओं की भूमिका बताई।फिर भी उन्होंने साफ कहा कि उनके नेता सिर्फ अखिलेश यादव हैं।यह बयान उनकी निष्ठा दिखाता है।

रुचिवीरा ने सवाल क्यों खड़े किए?

सपा सांसद रुचिवीरा ने शादी के मेहमानों को लेकर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को बुलाना गलत संदेश देता है।उन्होंने यह भी पूछा कि डॉ हसन का उनके चुनाव में क्या योगदान था।यह बयान विवाद को और तेज कर गया।पार्टी के भीतर खेमेबंदी की चर्चा बढ़ गई।मीडिया में यह मुद्दा और उछल गया।नेतृत्व तक बात पहुंच गई।

क्या यह विवाद सपा की एकता को चोट पहुंचाएगा?

इस पूरे प्रकरण ने सपा को आईना दिखा दिया।एक निजी शादी कैसे संगठन की कमजोरी बन सकती है यह साफ हो गया।अब पार्टी नेतृत्व चाहता है कि फोकस चुनावी तैयारी पर रहे।वोटर लिस्ट से लेकर बूथ तक काम तेज हो।नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार पर लगाम लगानी होगी।लड़ाई जनता के मुद्दों पर होनी चाहिए।शादी के कार्ड पर नहीं।

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