‘कक्का’ की कैबिनेट में एंट्री, योगी ने ब्राह्मण कार्ड से खेला बड़ा दांव

मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में शामिल कर बीजेपी ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधने और विपक्ष के ‘ब्राह्मण उपेक्षा’ वाले नैरेटिव को कमजोर करने की कोशिश की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे को मंत्री बनाए जाने का फैसला केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है. ‘कक्का’ के नाम से मशहूर मनोज पांडे लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल रहे, लेकिन अब योगी सरकार में उनकी एंट्री ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं.

अखिलेश यादव के करीबी थे मनोज पांडे

मनोज पांडे कभी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे और पार्टी में मजबूत ब्राह्मण प्रतिनिधित्व का चेहरा थे. हालांकि राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके अचानक रुख बदलने ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी. उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा, जिसे भाजपा ने अपनी बड़ी राजनीतिक सफलता माना. अब उन्हें मंत्री पद देकर पार्टी ने उनके प्रति भरोसा और सम्मान दोनों का संकेत दिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम ब्राह्मण समुदाय को साधने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ समय से विपक्ष लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है. इस तरह के आरोपों और चर्चाओं के बीच मनोज पांडे को मंत्री बनाना पार्टी की ओर से स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि सरकार सभी वर्गों के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहती है.

मनोज पांडे को कैबिनेट में शामिल करना रणनीतिक फैसला 

कुछ महीने पहले बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक की खबर ने भी सियासी हलकों में चर्चा बढ़ा दी थी. माना गया कि पार्टी नेतृत्व तक यह संदेश पहुंचा कि इस वर्ग की नाराजगी को नजरअंदाज करना भविष्य में नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में मनोज पांडे जैसे प्रभावशाली नेता को कैबिनेट में शामिल करना रणनीतिक फैसला माना जा रहा है.

इस नियुक्ति का एक बड़ा असर रायबरेली और अमेठी जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, जहां ब्राह्मण मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इन इलाकों में मनोज पांडे की मजबूत पकड़ बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.

इसके साथ ही भाजपा ने उन नेताओं को भी संकेत दिया है जो दूसरी पार्टियों से उसके साथ आने का विचार कर रहे हैं. पार्टी ने साफ कर दिया है कि जो नेता उसके साथ खड़ा होगा, उसे केवल जगह ही नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी मिलेगी.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag