ईरान-इजराइल तनाव के बाद बांग्लादेश में डीजल की किल्लत, घंटों लाइन में लगना पड़ रहा

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है. इस उथल-पुथल की वजह से बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भारी संकट का सामना कर रहा है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

बांग्लादेश इन दिनों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के सबसे भयावह असर की चपेट में है. देश गहरे ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, जहां 95 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें आयातित ईंधन पर टिकी हैं. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने न सिर्फ खाड़ी क्षेत्र की शांति बिगाड़ी है, बल्कि बांग्लादेश जैसी अर्थव्यवस्थाओं को भी बुरी तरह झकझोर दिया है.

देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं. पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हैं, सरकार ने बिजली बचाने के लिए कामकाजी घंटों में कटौती कर दी है और स्कूल-कॉलेज लंबे समय से बंद पड़े हैं.

पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें

पेट्रोल पंपों के बाहर का मंजर किसी युद्धग्रस्त इलाके जैसा लग रहा है. लोग घंटों नहीं, बल्कि आधे-आधे दिन तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. कॉक्स बाजार जैसे पर्यटन शहरों में स्थिति और भी गंभीर है. अलजजीरा ने लंबी दूरी की बसें चलाने वाले 48 वर्षीय ड्राइवर अब्दुल गनी के हवाले से बताया कि उन्हें अपनी बस में डीजल डलवाने के लिए करीब साढ़े पांच घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ा.

वैश्विक युद्ध की कीमत चुका रही बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था

बांग्लादेश में इस बढ़ते संकट का मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है. दुनिया का ज्यादातर कच्चा तेल इसी रास्ते से एशियाई देशों तक पहुंचता है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने इस महत्वपूर्ण जल मार्ग को पूरी तरह असुरक्षित बना दिया है.

सरकार ने कामकाजी घंटों में की कटौती

बिजली बचाने और नेशनल ग्रिड पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने तुरंत कामकाजी घंटों में कटौती कर दी है. परिवहन व्यवस्था ठप होने के कारण छात्रों और शिक्षकों के लिए कोई साधन नहीं बचा है, इसलिए स्कूल और कॉलेज लंबे समय से बंद कर दिए गए हैं.

जनता में बढ़ रहा गुस्सा

बांग्लादेशी जनता अब इस वैश्विक तनाव को लेकर तेजी से गुस्सा जता रही है. लोग पूछ रहे हैं कि एक दूर देश में छिड़ी जंग का खामियाजा उन्हें अपनी रसोई और सड़कों पर क्यों भुगतना पड़ रहा है.

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