अमेरिका में जन्म के साथ नागरिकता पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, फिर छिड़ी बड़ी बहस

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर बहस तेज हो गई है, जहां डोनाल्ड ट्रंप ने इसके दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए न्यायपालिका की आलोचना की है. सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई इस नीति के भविष्य और इसकी संवैधानिक वैधता पर बड़ा असर डाल सकती है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता देने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विषय पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायपालिका की आलोचना की है और कहा है कि मौजूदा व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है. इसी बीच, इस संवेदनशील मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है, जिससे इसकी संवैधानिक वैधता को लेकर चर्चा और तेज हो गई है. 

जन्मसिद्ध नागरिकता पर क्या बोले ट्रंप? 

यह विवाद अब केवल कानून तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी गहराई से असर डाल रहा है. ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता का उद्देश्य मूल रूप से उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करना था, जिन्हें गुलामी के दौर में बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया था. उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में इस प्रावधान का इस्तेमाल दुनिया के कई संपन्न लोग अपने फायदे के लिए कर रहे हैं, जो इसकी मूल भावना के खिलाफ है. इसके साथ ही उन्होंने कुछ न्यायिक फैसलों पर सवाल उठाते हुए उन्हें कमजोर बताया, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है.

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का प्रावधान 1868 में लागू किए गए 14वें संशोधन से जुड़ा है. इस संशोधन का मकसद उन लोगों को नागरिकता देना था, जो गुलामी से आजाद हुए थे, ताकि उन्हें बराबरी के अधिकार मिल सकें. इस कानून के तहत अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति स्वतः नागरिक माना जाता है. हालांकि, ट्रंप और उनके समर्थकों का मानना है कि यह नियम वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार पुराना हो चुका है और इसमें बदलाव की आवश्यकता है.

नागरिकता से जुड़े नियमों में बदलाव

वैश्विक स्तर पर भी नागरिकता से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिला है. दुनिया के कई देशों में पहले ‘जस सोली’ यानी जन्म के आधार पर नागरिकता दी जाती थी, लेकिन समय के साथ कई देशों ने इस नीति को सीमित या समाप्त कर दिया. अब कई जगह ‘जस सैंगुइनिस’ यानी वंश के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था अपनाई जा रही है.

आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है. यदि अदालत किसी बदलाव का संकेत देती है, तो इसका असर अमेरिका की नागरिकता नीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है. साथ ही, यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस को नई दिशा दे सकता है. फिलहाल, सबकी नजर इस महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिकी हुई है.

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