होर्मुज पर लगेगा टोल? ईरान-ओमान की नई योजना से तेल व्यापार पर पड़ेगा असर

ईरान और ओमान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है. इस फैसले के असर और इससे जुड़े बड़े सवाल अभी सामने आना बाकी हैं.

Shraddha Mishra

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच हुआ दो हफ्तों का युद्धविराम सिर्फ सैन्य राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ एक ऐसा प्रस्ताव भी जुड़ा है, जो वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है. इस योजना के तहत ईरान और ओमान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी जा सकती है. यह कदम अगर लागू होता है, तो दुनिया के तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो केवल 34 किलोमीटर चौड़ा है, दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है. यह ओमान और ईरान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आता है और लंबे समय से इसे एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. अब तक इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल नहीं लगाया गया था. लेकिन नए प्रस्ताव के तहत ईरान और ओमान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से पारगमन शुल्क वसूल सकते हैं. यह बदलाव वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.

युद्ध के बाद पुनर्निर्माण की योजना

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस शुल्क से मिलने वाली राशि का उपयोग युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण में करना चाहता है. हालिया संघर्ष में देश के रक्षा ढांचे, सरकारी संस्थानों और आम बुनियादी सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचा है. ईरान के अधिकारियों का कहना है कि यह आर्थिक कदम देश को फिर से खड़ा करने में मदद करेगा और नुकसान की भरपाई का एक जरिया बनेगा.

40 दिन बाद युद्धविराम

करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम पर सहमति जताई है. इसके तहत ईरान ने कुछ शर्तों के साथ इस जलमार्ग को फिर से खोलने की बात कही है. 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद यह रास्ता लगभग बंद हो गया था. इससे गुजरने वाले जहाजों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके चलते वैश्विक तेल कीमतों में तेजी से उछाल देखा गया.

आगे की बातचीत और उम्मीदें

इस मुद्दे पर आगे की बातचीत शुक्रवार से इस्लामाबाद में शुरू होने वाली बैठकों में की जा सकती है. इसमें अमेरिका और इजराइल के प्रतिनिधि शामिल होंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य सहित कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बातचीत को लेकर उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा दिया गया 10 सूत्रीय प्रस्ताव बातचीत के लिए एक मजबूत आधार है और आने वाले दो हफ्तों में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है.

शुल्क को लेकर क्या है योजना?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पारगमन शुल्क अलग-अलग जहाजों के लिए अलग हो सकता है. यह जहाज के प्रकार, उसके माल और मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने हाल ही में बताया था कि इस विषय पर ओमान के साथ एक समझौते का मसौदा तैयार किया जा रहा है. उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जहाजों की आवाजाही को रोकना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से व्यवस्थित करना है.

खाड़ी देशों की चिंता

संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि समुद्री मार्गों को पूरी तरह स्वतंत्र और खुला रहना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के वित्तीय निर्णयों को फिलहाल टाल देना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, यानी UNCLOS के अनुसार, किसी भी देश को केवल रास्ता देने के बदले शुल्क लेने की अनुमति नहीं है. हालांकि, कुछ खास सेवाओं जैसे जहाजों को दिशा दिखाने या बंदरगाह सुविधाओं के लिए सीमित शुल्क लिया जा सकता है. साथ ही, यह भी जरूरी है कि किसी एक देश के जहाजों पर ज्यादा शुल्क न लगाया जाए. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रस्तावित योजना अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत कैसे लागू की जाती है.

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