डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया में हो रही बेईज्जती! इन दो देशों ने अमेरिकी लोगों की एंट्री पर लगा दिया बैन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई यात्रा पाबंदियों के खिलाफ माली और बुर्किना फासो ने कड़ा जवाब दिया है. पश्चिम अफ्रीका के इन दो देशों ने अमेरिकी नागरिकों पर पाबंदी लगा दी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई यात्रा पाबंदियों के खिलाफ पश्चिम अफ्रीका के दो देशों ने कड़ा जवाब दिया है. माली और बुर्किना फासो ने अमेरिकी नागरिकों के अपने यहां प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया. यह कदम पारस्परिकता के सिद्धांत पर आधारित है. दोनों देशों ने साफ कहा कि अमेरिका ने उनके नागरिकों पर जो पाबंदियां लगाई हैं, वही नियम अब अमेरिकियों पर लागू होंगे.
क्या हैं ट्रंप की यात्रा पाबंदियां?
ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2025 में यात्रा प्रतिबंधों का विस्तार किया. अब कुल 39 देशों के नागरिकों पर पूर्ण या आंशिक पाबंदियां लागू हैं, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गई है. इनमें बुर्किना फासो और माली को पूरी तरह प्रवेश प्रतिबंधित देशों की सूची में डाला गया है. अमेरिका का तर्क है कि ये देश सुरक्षा जांच, वीजा प्रक्रिया और जानकारी साझा करने में कमियां रखते हैं.
साथ ही आतंकवाद और अपराध का खतरा बताया गया है. सूची में 25 अफ्रीकी देश हैं, जिनमें सीरिया, फिलिस्तीन, नाइजर, सिएरा लियोन और दक्षिण सूडान जैसे गरीब राष्ट्र शामिल है. सेनेगल और आइवरी कोस्ट पर आंशिक प्रतिबंध है.
माली और बुर्किना फासो का जवाब
बुर्किना फासो के विदेश मंत्री करामोको जीन मैरी त्राओरे ने बयान में कहा कि अमेरिकी नागरिकों पर ठीक वही नियम लागू होंगे जो अमेरिका ने उनके लोगों पर थोपे हैं. माली के विदेश मंत्रालय ने भी यही ऐलान किया और अमेरिका के एकतरफा फैसले पर गहरा अफसोस जताया. दोनों देश साहेल क्षेत्र में हैं, जहां हाल के वर्षों में सैन्य तख्तापलट हुए हैं. पश्चिमी देशों से दूरी बढ़ रही है और रूस की तरफ झुकाव दिख रहा है.
अमेरिका-अफ्रीका संबंधों में तनाव
यह जवाबी कार्रवाई अमेरिका-अफ्रीका संबंधों में नई तनाव पैदा कर सकती है. अमेरिकी नागरिकों के लिए इन देशों में व्यापार, मानवीय सहायता या यात्रा मुश्किल हो जाएगी. कुछ रिपोर्टों में नाइजर का भी ऐसा कदम उठाने की संभावना जताई गई है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की सख्त नीतियां वैश्विक स्तर पर जवाबी प्रतिक्रियाएं बढ़ा रही हैं. इससे अमेरिका की छवि प्रभावित हो सकती है. यह घटना अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एकतरफा फैसलों के खतरों को उजागर करती है. आने वाले दिनों में और देशों की प्रतिक्रिया देखने लायक होगी.


