नाटो के साथ बढ़ते मतभेदों के मद्देनजर ट्रंप का बड़ा फैसला, जर्मनी से 5000 से ज्यादा सैनिक हटाने की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी से हजारों सैनिकों को वापस बुलाने का संकेत दिया है. इस फैसले से NATO और यूरोप में तनाव बढ़ सकता है. ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या में 'बड़ी कमी' करेगा.

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या में बड़ी कटौती करने जा रहा है. शनिवार को फ्लोरिडा में एयर फोर्स वन पर सवार होने से पहले ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या में 'बड़ी कमी' करेगा.
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कटौती 5,000 सैनिकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे भी अधिक हो सकती है. दूसरी ओर, पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि जर्मनी में मौजूद लगभग 36,000 अमेरिकी सैनिकों में से करीब 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बनाई गई है. यह प्रक्रिया अगले 6 से 12 महीनों के भीतर पूरी की जा सकती है.
नाटो के साथ बढ़ता तनाव
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और नाटो के बीच रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है. खासकर ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर कई नाटो देशों ने अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. ट्रंप पहले भी नाटो की आलोचना कर चुके हैं. उन्होंने इस सैन्य गठबंधन को “कमजोर” बताते हुए यहां तक कहा था कि अमेरिका इससे बाहर भी निकल सकता है. ट्रंप का मानना है कि ईरान युद्ध के दौरान उन्हें नाटो से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला.
जर्मनी की प्रतिक्रिया और नाराजगी
जर्मनी, जहां अमेरिका के कई अहम सैन्य अड्डे मौजूद हैं, ने भी अमेरिकी नीतियों पर सवाल उठाए हैं. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने हाल ही में बयान दिया था कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका को “अपमानित” कर रहा है और अमेरिकी रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत है. उनके इस बयान के बाद अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आई. इसके तुरंत बाद पेंटागन ने सैनिकों की वापसी का ऐलान कर दिया, जिसे कई विश्लेषक जर्मनी के प्रति एक सख्त संदेश के तौर पर देख रहे हैं.
पेंटागन का आधिकारिक रुख
पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि सैनिकों की वापसी एक योजनाबद्ध प्रक्रिया के तहत होगी और इसे जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाएगा. हालांकि, इस फैसले के पीछे की असली रणनीति को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं. नाटो ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अमेरिका के साथ मिलकर इस फैसले के सभी पहलुओं को समझने की कोशिश कर रहा है. गठबंधन के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का असर पूरे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है.
यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी थी तैनाती
गौरतलब है कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी. उस समय यह कदम यूरोप की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया था. लेकिन अब मौजूदा हालात में अमेरिका का यह फैसला रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है. इससे यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर रहा है.
जर्मनी की संयमित प्रतिक्रिया
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस फैसले पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा सैनिकों की वापसी 'अप्रत्याशित नहीं' है और इस संभावना का पहले से अनुमान लगाया जा रहा था. उन्होंने यह भी जोर दिया कि अगर ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना है, तो यूरोपीय देशों को नाटो के भीतर अपनी भूमिका और मजबूत करनी होगी.


