US ने लगाए टेक सैंक्शन, पुतिन ने निकाला जुगाड़, बर्तन धोने वाली मशीन से बनाई घातक मिसाइलें
व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में रूस ने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से निपटने के लिए गजब का जुगाड़ निकाल लाया है. रूस घरेलू उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोचिप्स का उपयोग अपनी सैन्य तकनीक में कर रहा है.

दुनिया में आधुनिक हथियारों, खासकर मिसाइलों के निर्माण के लिए उन्नत तकनीक और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरत होती है. ऐसे में जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, तो यह माना जा रहा था कि इसका रूस की सैन्य क्षमता पर गंभीर असर सकता है. खासतौर पर सेमीकंडक्टर चिप्स और तकनीकी उपकरणों की सप्लाई रोकने से रूस की मिसाइल और रक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती थी. लेकिन हाल ही में सामने आई रिपोर्ट ने इस कयासों को पूरी तरह पलट दिया है.
पुतिन ने निकाला जुगाड़
जानकारी के मुताबिक व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में रूस ने इन प्रतिबंधों से निपटने के लिए गजब का जुगाड़ निकाल लाया है. दावा किया जा रहा है कि रूस घरेलू उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोचिप्स का उपयोग अपनी सैन्य तकनीक में कर रहा है. इनमें डिशवॉशर, वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल हैं, जिनमें लगे माइक्रो-कंट्रोलर चिप्स को निकालकर मिसाइलों और हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक मिसाइलों का संचालन केवल भारी धातुओं पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इसमें लगे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और चिप्स बेहद अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में अगर उन्नत चिप्स की उपलब्धता सीमित हो जाए, तो वैकल्पिक स्रोतों से समान कार्य करने वाले कंपोनेंट्स का उपयोग किया जा सकता है.
ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी
रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने पड़ोसी देशों के जरिए बड़ी संख्या में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात बढ़ाया है. इन उपकरणों को सीधे बाजार में बेचने के बजाय विशेष चैनलों के माध्यम से अलग किया जाता है और उनके अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों का इस्तेमाल रक्षा उत्पादन में किया जाता है. इस प्रक्रिया को कुछ विश्लेषक “ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी” का उदाहरण मानते हैं, जहां आम नागरिक उपयोग की वस्तुएं सैन्य जरूरतों को पूरा करने में काम आती हैं.
रूस ने अपनाए नए तरीके
हालांकि, इन दावों की पूरी तरह पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन यह साफ है कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस अपनी सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए नए तरीके अपना रहा है. यह भी माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर निगरानी तंत्र मुख्य रूप से हाई-टेक निर्यात पर केंद्रित है, जबकि साधारण उपभोक्ता वस्तुओं के जरिए तकनीक के स्थानांतरण को रोकना ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. रूस के इस जुगाड़ ने यह तो साफ कर दिया कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की ताकत से नहीं, बल्कि संसाधनों के प्रबंधन और तकनीकी अनुकूलन की क्षमता से भी तय होता है.


