क्या कांग्रेस में राहुल गांधी हुए साइडलाइन? प्रियंका को आगे लाने के बड़े संकेत

राहुल गांधी के विदेश जाने के बाद कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली में साफ बदलाव नजर आने लगा है. अब प्रियंका गांधी न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि इंडिया ब्लॉक की कमान भी सामने से संभालती दिख रही हैं. पार्टी ऐसे फैसले और पहल करती दिखाई दे रही है, जो राहुल गांधी की मौजूदगी में पहले शायद ही देखने को मिलती थीं.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

हाल ही में संपन्न हुए संसद के शीतकालीन सत्र ने देश की राजनीति में कुछ अहम संकेत दिए हैं. इस सत्र के दौरान दो बड़े बदलाव साफ तौर पर उभरकर सामने आए. पहला बदलाव भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक स्थिति को लेकर है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें घटने के बाद यह माना जा रहा था कि प्रधानमंत्री की पकड़ कमजोर हुई है, लेकिन शीतकालीन सत्र में सरकार के रवैये और कामकाज ने इस धारणा को काफी हद तक गलत साबित किया. मोदी सरकार ने संसद में वही आत्मविश्वास और नियंत्रण दिखाया, जैसा वह पिछले दो कार्यकालों में दिखाती रही है.

प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका बढ़ी

दूसरा और अधिक दिलचस्प बदलाव कांग्रेस पार्टी के भीतर नजर आया. सत्र के शुरुआती दिनों के बाद यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की अगुवाई में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका बढ़ती जा रही है, जबकि राहुल गांधी अपेक्षाकृत हाशिये पर दिखाई दिए. संसद के समापन दिवस पर यह बदलाव और भी प्रतीकात्मक रूप में सामने आया, जब प्रियंका गांधी ने संसदीय परंपराओं से जुड़ी एक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और उनके मंत्रियों के साथ सहजता से हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की और माहौल काफी सहज नजर आया. कांग्रेस नेतृत्व और पीएम मोदी के बीच इस तरह की खुली बातचीत पहले शायद ही देखने को मिली हो.

इससे एक दिन पहले प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उनके संसद भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात की थी. यह मुलाकात प्रश्नकाल के दौरान हुई बातचीत के बाद तय हुई, जिसे गडकरी ने तुरंत स्वीकार कर लिया. प्रियंका की यह सक्रियता और संवाद का तरीका कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति से अलग नजर आया, खासकर तब जब राहुल गांधी देश से बाहर थे. इन दो दिनों में प्रियंका ने एक परिपक्व और निर्णायक नेता की छवि पेश की, जिसने राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाओं को जन्म दिया.

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ के भीतर असंतोष

इसी बीच, राहुल गांधी की अनुपस्थिति और उनकी रणनीतियों को लेकर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ के भीतर असंतोष भी खुलकर सामने आने लगा. वोटिंग प्रक्रिया, ईवीएम और कथित गड़बड़ियों जैसे मुद्दों पर राहुल के रुख को लेकर सहयोगी दलों ने दूरी बनानी शुरू कर दी. बिहार चुनाव के नतीजों ने इस असहजता को और बढ़ा दिया, जहां महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा.

शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस नेतृत्व को लेकर सवाल तब और गहरे हो गए, जब ओडिशा के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में नए और युवा नेतृत्व को आगे लाने की मांग की. इस पत्र में प्रियंका गांधी का नाम भी सुझाया गया. भले ही पार्टी ने उस नेता के खिलाफ कार्रवाई की हो, लेकिन इसके बाद प्रियंका की बढ़ी हुई सक्रियता ने यह संकेत जरूर दिया है कि कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर भीतर ही भीतर मंथन तेज हो चुका है.

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