करूर भगदड़ केस: CBI ने TVK प्रमुख विजय को जारी किया समन, 12 जनवरी को होगी पेशी
करूर रैली भगदड़ मामले में CBI ने TVK प्रमुख और अभिनेता विजय को 12 जनवरी को पेश होने के लिए समन जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एजेंसी 41 मौतों वाली घटना की निष्पक्ष जांच कर रही है.

करूर भगदड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अभिनेता-राजनेता और तमिलागा वेट्री कड़गम (TVK) के संस्थापक विजय को समन जारी किया है. अधिकारियों के अनुसार, उन्हें 12 जनवरी को जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है. यह कदम उस समय उठाया गया है, जब CBI इस दर्दनाक घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है.
यह हादसा 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर जिले के वेलुस्वामीपुरम इलाके में हुआ था. यहां टीवीके की एक राजनीतिक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें विजय के भाषण को सुनने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचे थे. भीड़ अचानक बेकाबू हो गई, जिससे भगदड़ मच गई. इस दुखद घटना में 41 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को सौंपी थी जांच
शुरुआत में तमिलनाडु सरकार ने इस मामले की CBI जांच का विरोध किया था. राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है और इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पूरी तरह सक्षम है. सरकार का कहना था कि SIT स्थानीय हालात को बेहतर तरीके से समझ सकती है.
हालांकि, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करूर भगदड़ की घटना ने "राष्ट्रीय अंतरात्मा को झकझोर दिया है" और इसकी निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच जरूरी है. इसी आधार पर कोर्ट ने जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया और SIT को जारी रखने के अनुरोध को खारिज कर दिया.
CBI ने हर पहलू से की जांच
CBI ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद कई अहम पहलुओं की पड़ताल शुरू की है. इसमें रैली के लिए दी गई अनुमति, भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था, पुलिस की तैनाती, आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और घटना के समय की प्रतिक्रिया शामिल है. इसके साथ ही टीवीके के वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं.
न्यायालयों की सख्ती और आगे की दिशा
हादसे के तुरंत बाद मद्रास हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि वह राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुरक्षा मानकों को मजबूत करे. इसके तहत एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर अदालत के सामने पेश करने को कहा गया था, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.


