‘हाउडी मोदी’ पर भारी पड़ा ‘नमस्ते ट्रंप’? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस का हमला, केंद्र से पूछे सवाल
भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी ने किसानों और व्यापार संतुलन पर असर की आशंका जताई, जबकि सरकार ने दावा किया कि शुल्क में कमी और 500 अरब डॉलर की खरीद से भारत को फायदा होगा.

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है. जहां केंद्र सरकार इसे दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं. पार्टी का कहना है कि इस समझौते से भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला और यह दिखावटी कूटनीति का परिणाम है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल ही में जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में कई अहम बिंदुओं का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “हाउडी मोदी” पर “नमस्ते ट्रंप” भारी पड़ गया. ये दोनों कार्यक्रम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान आयोजित बड़े राजनीतिक आयोजन थे, जिनका मकसद दोनों देशों के संबंधों को मजबूत दिखाना था.
रमेश का दावा है कि समझौते से यह संकेत मिलता है कि भारत रूस से तेल आयात नहीं करेगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि भारत सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है तो उस पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाया जा सकता है.
समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ जा सकता है. जयराम रमेश के अनुसार, भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती कर सकता है, जिससे अमेरिकी किसानों को फायदा होगा. उनका कहना है कि इससे भारत का अमेरिका के साथ लंबे समय से चला आ रहा व्यापार अधिशेष प्रभावित हो सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को भारतीय आईटी और अन्य सेवाओं के निर्यात को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है. साथ ही यह आशंका जताई गई है कि भारत के अमेरिका को वस्तुओं के निर्यात पर पहले से ज्यादा शुल्क लग सकता है.
सरकार ने खारिज किए आरोप
वहीं केंद्र सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अलग रखा गया है, इसलिए किसानों पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. सरकार के अनुसार, भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदेगा. इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी उपकरण और कोकिंग कोयला शामिल हैं.
शुल्क में कमी से निर्यात को बढ़ावा
ट्रेड डील के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है. पिछले साल रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क और अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा नुकसान हुआ था.
अब शुल्क में कमी से कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. चूंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए यह राहत भारतीय कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.


