भारतीय क्रिकेट का सबसे भद्दा कलंक! सालों बाद गांगुली ने सचिन-द्रविड़ से क्यों पूछा ‘क्या तुम्हें किसी ने मैच फिक्सिंग के लिए अप्रोच किया था?’

सौरव गांगुली ने खुलासा किया कि कप्तान बनते ही उन्होंने सबसे पहले सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले से सीधा सवाल किया था, “क्या कभी किसी ने तुमसे मैच फिक्स करने के लिए संपर्क किया?”

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: 2000 में फिक्सिंग विवाद के बाद जब सौरव गांगुली को 27 साल की उम्र में टीम इंडिया की कप्तानी मिली, तो वो खुद इस पूरे मामले की सच्चाई से अनजान थे। हाल ही में राज शमानी के पॉडकास्ट में दादा खुलासा किया कि कप्तान बनते ही उन्होंने सबसे पहले सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले से सीधा सवाल किया था, “क्या कभी किसी ने तुमसे मैच फिक्स करने के लिए संपर्क किया?” 

सचिन और द्रविड़ ने दिया ये जवाब 

आपको बताते चलें कि इस दौरान सौरव गांगुली ने यह भी बताया कि तीनों दिग्गजों का जवाब एक ही था: 'नहीं'। दादा ने कहा, “मुझे तो सट्टेबाजी, फिक्सिंग के बारे में कुछ पता ही नहीं था। मैं लगातार सचिन और राहुल से पूछता रहता था कि क्या सच में ऐसा होता है? क्योंकि मुझसे तो किसी ने संपर्क नहीं किया था।” अनिल कुंबले ने भी यही बात दोहराई। उस वक्त गांगुली टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट खेल रहे थे, लेकिन फिक्सिंग का मुद्दा उनके लिए बिल्कुल नया था।

भारतीय क्रिकेट का मुश्किल दौर   

ये वो दौर था जब हैंसी क्रोन्ये कांड ने दुनिया को हिलाया था। भारत में मोहम्मद अजहरुद्दीन पर आजीवन बैन लगा, अजय जडेजा 5 साल के लिए सस्पेंड हुए। फैंस का भरोसा टूट चुका था। ऐसे में गांगुली के सामने सिर्फ टीम को जिताना नहीं, बल्कि क्रिकेट की साख वापस लाना भी चुनौती थी।

कप्तानी का पहला दिन   

सौरव गांगुली ने माना कि इतनी कम उम्र में कप्तानी मिलना डरावना था। कोच्चि में पहले मैच से पहले टीम मीटिंग में बोलने से वो घबरा रहे थे। उन्होंने पत्नी डोना से कहा था, “अजहर, सचिन मेरे कप्तान रह चुके हैं। मैं उन्हें क्या बताऊं?” इसलिए उन्होंने 15 मिनट में मीटिंग खत्म कर दी। अगला दिन भारत जीता और जमशेदपुर में गांगुली ने खुद शतक लगाया। वहां से टीम का ग्राफ ऊपर जाने लगा।

टीम इंडिया का नया युग   

गौरतलब है कि गांगुली की कप्तानी में भारत विदेशों में जीतने लगा। 2003-04 में ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी ड्रॉ कराई, पाकिस्तान में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती, 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी और चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की। फिक्सिंग के बाद बिखरी टीम को जोड़ने और युवराज, हरभजन, सहवाग जैसे युवाओं को मौका देने का श्रेय गांगुली को जाता है। इसी टीम ने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट का सुनहरा दौर लिखा।

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