हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे...जानें भारत की जनसंख्या पर ऐसा क्यों बोले CM चंद्रबाबू नायडू

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि भारत की बढ़ती जनसंख्या और विदेशों में भारतीयों की सफलता देश को वैश्विक प्रभुत्व दिलाने की संभावना दिखाती है. उन्होंने परिवारों में कम से कम तीन बच्चों की जरूरत पर जोर दिया.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

अमरावती : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में भारत की जनसंख्या और उससे देश को होने वाले लाभों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या वृद्धि और विदेशों में भारतीयों की सफलता देश को वैश्विक प्रभुत्व दिलाने की संभावना को दर्शाती है. नायडू ने स्पष्ट किया कि यह तभी संभव है जब पॉपुलेशन के रिप्लेसमेंट स्तर को बनाए रखा जाए. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई देशों में आबादी घट रही है, जबकि भारत का जनसंख्या ग्रोथ सकारात्मक दिशा में है.

अंतर्राष्ट्रीय तुलना और भारत की संभावनाएं

नायडू ने विश्व के अन्य देशों की जनसंख्या की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका में यह 8% है, जबकि चीन की जनसंख्या 11% घट रही है और जर्मनी भी आबादी में कमी का सामना कर रहा है. इसके विपरीत, भारत 148% की दर से जनसंख्या जोड़ने की स्थिति में है. उन्होंने कहा कि जापान और यूके जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी जनसंख्या घट रही है, जिससे उम्र बढ़ने और घटती आबादी की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. नायडू ने सुझाव दिया कि हर भारतीय परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए ताकि जनसंख्या का रिप्लेसमेंट स्तर सुनिश्चित हो सके.

विदेशों में भारतीयों की सफलता
चंद्रबाबू नायडू ने विदेशों में भारतीयों की उपलब्धियों को भी उजागर किया. उन्होंने कहा कि लगभग चार से पांच करोड़ भारतीय विदेशों में रहते हैं और उनकी प्रति व्यक्ति आय वहां सबसे अधिक है. उदाहरण के तौर पर, अमेरिका में भारतीयों की औसत आय लगभग 1,30,000 डॉलर है, जबकि अमेरिकी नागरिकों की औसत आय 55,000 से 60,000 डॉलर के बीच है. नायडू ने यह भी कहा कि भारतीयों की यह आर्थिक सफलता वैश्विक स्तर पर भारत की प्रभावशीलता को बढ़ाने में मदद कर सकती है.

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जो सुझाव दिया...
सीएम ने यह भी स्वीकार किया कि हाल ही में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जो सुझाव दिया था कि हर परिवार को तीन बच्चे होने चाहिए, वह महत्वपूर्ण और सही है. नायडू ने इसे अपनाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में धीरे-धीरे रिप्लेसमेंट लेवल को बनाए रखना शामिल है. उन्होंने कहा कि अगर देश 2047 तक अपनी जनसंख्या पर ध्यान केंद्रित करे, तो भारत वैश्विक परिदृश्य में प्रभावशाली और असाधारण स्थिति हासिल कर सकता है.

चंद्रबाबू नायडू का यह बयान न केवल भारत की वर्तमान जनसंख्या स्थिति को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सही जनसंख्या नीति और भारतीयों की वैश्विक सफलता मिलकर देश को भविष्य में वैश्विक प्रभुत्व दिलाने में सहायक हो सकती है. उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीय विकास, वैश्विक प्रभाव और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जुड़ा हुआ है.

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