शपथ से पहले ‘वंदे मातरम्’ की गूंज, विजय के शपथ समारोह दिखा देशभक्ति का भव्य रंग
केंद्र सरकार के नए निर्देशों के महीनों बाद विजय के शपथ ग्रहण समारोह में पहली बार वंदे मातरम् का पूरा छह अंतरों वाला संस्करण गूंजा. राष्ट्रगान से पहले बजाए गए इस गीत ने समारोह को खास बना दिया और मंच पर राष्ट्रभक्ति का माहौल देखने को मिला.

चेन्नई: केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन लागू होने के महीनों बाद तमिलनाडु में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे विजय के समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा छह अंतरों वाला संस्करण प्रस्तुत किया गया. चेन्नई में आयोजित इस समारोह में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रीय गीत का संपूर्ण गायन किया गया, जो गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप था.
दिलचस्प बात यह रही कि एक दिन पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण नहीं बजाया गया था. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद थे.
केंद्र की गाइडलाइन के बाद बढ़ा था विवाद
जनवरी में नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई थी. इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की थी और इसे लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था.
गृह मंत्रालय के 28 जनवरी के निर्देश में कहा गया था कि आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के मूल छहों अंतरे गाए जाएंगे. इससे पहले केवल दो अंतरे ही गाए जाने की परंपरा थी, जिसे संविधान सभा ने 1950 में अपनाया था.
राहुल गांधी और विजय रहे मंच पर मौजूद
चेन्नई में आयोजित विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया गया. इस दौरान मंच पर राहुल गांधी और विजय साथ मौजूद रहे. समारोह में राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज रही, क्योंकि हाल के महीनों में यह मुद्दा लगातार बहस का केंद्र बना हुआ था.
ममता बनर्जी ने जताई थी आपत्ति
फरवरी में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की इस गाइडलाइन पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने इसे रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान बताया था. ममता बनर्जी का कहना था कि राष्ट्रगान, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था, उसे ‘वंदे मातरम्’ के बाद नहीं बजाया जाना चाहिए.
कब लिखा गया था ‘वंदे मातरम्’?
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को प्रसिद्ध बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में लिखा था. यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख प्रतीक बना था.


