32 लाख लोगों को मिलेगा वोटर लिस्ट सुधार का मौका, SIR पर शुरू हुई सुनवाई

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 32 लाख अनलिंक्ड मतदाताओं की सुनवाई शनिवार से 3,234 केंद्रों पर शुरू होगी, जहां दस्तावेजों के आधार पर नाम जोड़े जाएंगे. पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया पूरी कर 14 फरवरी को अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जाएगी, जिसके बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा संभव है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया तेजी से जारी है और शनिवार से लोगों की शिकायतों और दावों पर सुनवाई शुरू होने जा रही है. इस प्रक्रिया के लिए राज्य भर में कुल 3,234 केंद्र स्थापित किए गए हैं. पहले चरण में उन 32 लाख लोगों को बुलाया गया है जिनका 2022 की वोटर लिस्ट से कोई लिंक नहीं मिला. 

अब ये लोग निर्धारित दस्तावेज जमा करके अपने नाम को लिस्ट में जोड़वा सकते हैं. जमा किए जाने वाले दस्तावेजों में आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र शामिल हैं, लेकिन केवल आधार कार्ड ही पर्याप्त नहीं होगा. नाम जुड़वाने के लिए इसके साथ कोई वैध सपोर्टिंग दस्तावेज भी देना आवश्यक है.

वैध दस्तावेज के रूप में वोटर लिस्ट स्वीकार 

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में तैयार की गई वोटर लिस्ट को भी वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा. हालांकि किसी भी तरह के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. राज्य के निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि सुनवाई की पूरी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में कुल 4,500 माइक्रो ऑब्जर्वर्स नजर बनाए रखेंगे. सुनवाई केंद्रों पर केवल ईआरओ, बीएलओ और एआरओ को ही प्रवेश की अनुमति होगी. सुनवाई पूरी हो जाने के बाद किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा.

चुनाव आयोग ने हर ईआरओ के लिए 150 मामलों की सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य तय किया है. प्रक्रिया की शुरुआत उन “अनमैप्ड” वोटर्स से होगी जिनका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं है. एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान कई असामान्य या संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जैसे ऐसे लोग जिनके पिता बनने की उम्र असामान्य रूप से कम थी या जिनके माता-पिता का नाम एक ही था.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान

16 दिसंबर को वोटर लिस्ट का प्रारंभिक संस्करण प्रकाशित किया गया था, जबकि अंतिम सूची 14 फरवरी को जारी की जाएगी. इसके बाद चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना मुख्य उद्देश्य है ताकि हर योग्य मतदाता को अपने मताधिकार का सही अवसर मिल सके.

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