आज भी जारी है लड़कियों का 'खतना', जानिए क्या है FGM और क्यों उठ रही इसे बंद करने की मांग

फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) यानी महिलाओं का खतना आज भी दुनिया के कई देशों में जारी है. यह प्रथा छोटी बच्चियों और किशोरियों के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और अधिकारों पर गंभीर असर डालती है. सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई के बीच FGM एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: देश और दुनिया में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लगातार बहस जारी है, लेकिन आज भी कई ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं जो लड़कियों की शारीरिक और मानसिक स्वतंत्रता पर गंभीर असर डालती हैं. ऐसी ही एक प्रथा है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM), जिसे आम भाषा में महिलाओं का ‘खतना’ कहा जाता है. यह प्रथा लंबे समय से विवादों में रही है और अब इस पर कानूनी और सामाजिक स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान यह मामला फिर चर्चा में आया. दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित इस प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर 9 जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि FGM क्या है, यह कितना खतरनाक है और इसे रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) क्या कदम उठा रहा है.

23 करोड़ से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां हो चुकी हैं शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 23 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन का शिकार हो चुकी हैं.

यह प्रथा अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के करीब 30 से अधिक देशों में अब भी जारी है. ज्यादातर मामलों में छोटी बच्चियों और 15 साल तक की लड़कियों पर यह प्रक्रिया की जाती है.

क्या है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM)?

FGM का मतलब महिलाओं या लड़कियों के बाहरी जननांगों को आंशिक या पूरी तरह काटना या किसी अन्य तरीके से नुकसान पहुंचाना है. यह बिना किसी चिकित्सीय आवश्यकता के किया जाता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कोई मेडिकल फायदा नहीं है. इसके विपरीत, यह महिलाओं की शारीरिक, मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है.

कितना खतरनाक है FGM?

FGM के कारण लड़कियों और महिलाओं को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जिनमे से तुरंत होने वाली समस्याएं है-

1. लंबे समय तक होने वाले नुकसान

2. बार-बार यूरिन इन्फेक्शन और पेशाब में दर्द

3. डिस्चार्ज, खुजली और अन्य संक्रमण

4. पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द

5. शरीर पर स्थायी निशान

6. यौन संबंध बनाने में दिक्कत और संतुष्टि की कमी

7. प्रसव के दौरान गंभीर समस्याएं

8. अधिक रक्तस्राव और सी-सेक्शन की जरूरत

9. नवजात शिशुओं की मौत का बढ़ता खतरा

10. डिप्रेशन, तनाव, चिंता और आत्मसम्मान में कमी जैसी मानसिक समस्याएं 

FGM के चार प्रकार

तेज दर्द

FGM के दौरान अत्यधिक असहनीय दर्द होता है.

ज्यादा खून बहना

कई मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव जानलेवा साबित हो सकता है.

सूजन और बुखार

जननांगों में सूजन और तेज बुखार की समस्या हो सकती है.

संक्रमण का खतरा

टेटनस समेत कई गंभीर संक्रमण होने का खतरा रहता है.

पेशाब में परेशानी

पेशाब करते समय दर्द और रुकावट की समस्या सामने आती है.

घाव भरने में दिक्कत

कटे हुए हिस्से में लंबे समय तक घाव बने रह सकते हैं.

आसपास के अंगों को नुकसान

जननांगों के आसपास के हिस्सों को भी नुकसान पहुंच सकता है.

सदमा और मौत

कुछ मामलों में लड़कियां मानसिक सदमे में चली जाती हैं और कई बार मौत तक हो जाती है.

टाइप 1

इसमें क्लिटोरिस के बाहरी हिस्से को आंशिक या पूरी तरह हटाया जाता है.

टाइप 2

इसमें क्लिटोरिस और योनि के अंदरूनी हिस्सों को काटा जाता है. कुछ मामलों में बाहरी हिस्सों को भी हटाया जाता है.

टाइप 3 (इन्फिबुलेशन)

यह सबसे गंभीर प्रकार माना जाता है. इसमें योनि के मुंह को सिकोड़कर सिल दिया जाता है.

टाइप 4

इसमें छेद करना, खुरचना, जलाना या किसी भी तरीके से जननांगों को नुकसान पहुंचाना शामिल है.

किन लड़कियों पर सबसे ज्यादा खतरा?

FGM का खतरा सबसे ज्यादा छोटी बच्चियों और किशोरियों पर होता है. हालांकि कई बार वयस्क महिलाओं के साथ भी यह प्रक्रिया की जाती है.

रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के 31 देशों में अब तक करोड़ों महिलाएं इसका शिकार हो चुकी हैं और हर साल करीब 40 लाख लड़कियों पर इसका खतरा बना रहता है.

आखिर क्यों की जाती है FGM?

सामाजिक दबाव

कई समाजों में इसे परंपरा और सम्मान से जोड़कर देखा जाता है.

शादी के लिए 'तैयार' करने की सोच

कुछ लोग इसे लड़कियों को शादी योग्य बनाने और उनकी "वर्जिनिटी" बनाए रखने का तरीका मानते हैं.

धार्मिक मान्यता

कुछ समुदाय इसे धार्मिक प्रथा मानते हैं, जबकि किसी भी प्रमुख धार्मिक ग्रंथ में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता.

चिंता की बात यह है कि कई मामलों में स्वास्थ्यकर्मी भी FGM जैसी प्रक्रियाओं में शामिल पाए गए हैं.

FGM रोकने के लिए WHO क्या कर रहा है?

साल 2008 में WHO ने FGM खत्म करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था. WHO हेल्थ वर्कर्स को गाइडलाइन और प्रशिक्षण देता है ताकि इस प्रथा को रोका जा सके और इससे पीड़ित महिलाओं का इलाज बेहतर तरीके से किया जा सके. इसके अलावा WHO लगातार रिसर्च कर रहा है कि FGM को खत्म करने के लिए कौन से उपाय सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं.

WHO ने कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर मेडिकल FGM के खिलाफ वैश्विक रणनीति तैयार की है और अलग-अलग देशों को इसे लागू करने में मदद कर रहा है.

मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा

विशेषज्ञों के अनुसार, FGM सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं बल्कि मानवाधिकारों का भी गंभीर मुद्दा है. इसे महिलाओं और बच्चियों की शारीरिक स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ माना जाता है.

यही वजह है कि दुनिया भर में इस प्रथा को खत्म करने की मांग लगातार तेज होती जा रही है.

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