कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद पर रोक लगाने वाला हाईकोर्ट का फैसला रद्द

दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी थी. इस फैसले से मामला फिर सुर्खियों में आ गया. वहीं, सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर स्पेशल लीव पिटिशन दाखिल की है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका दिया है. शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर उन्हें राहत दी गई थी. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के पास वापस भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही हाईकोर्ट से कहा है कि सेंगर की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने की कोशिश की जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार की

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की अपील को स्वीकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए. इससे पहले हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़िता ने निराशा जाहिर की थी, जबकि देशभर में लोगों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी. इसके बाद CBI ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

सुनवाई के दौरान क्या हुई बहस?

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान कुलदीप सेंगर की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने दलील दी कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग नहीं थी. वहीं CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील का विरोध किया. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का यह मानना गलत है कि विधायक लोक सेवक की श्रेणी में नहीं आता. जस्टिस जोयमाल्या बागची ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट का जरूरत से ज्यादा तकनीकी दृष्टिकोण उचित नहीं माना जा सकता.

POCSO कानून को लेकर भी फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इस मुद्दे पर भी दोबारा विचार करने को कहा है कि क्या यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी POCSO Act के तहत किसी विधायक को लोक सेवक माना जा सकता है. यह मुद्दा मामले की सुनवाई के दौरान अहम कानूनी बहस का हिस्सा बना रहा.

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 के अपने आदेश में कहा था कि सेंगर को POCSO Act की धारा 5(C) के तहत दोषी ठहराया गया था, जो किसी लोक सेवक द्वारा यौन शोषण से जुड़ी है. हालांकि हाईकोर्ट ने माना था कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत लोक सेवक की परिभाषा में नहीं आता. इसी आधार पर सेंगर को राहत दी गई थी.

2019 में हुई थी उम्रकैद की सजा

उन्नाव रेप केस में दिसंबर 2019 में निचली अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. इसके बाद जनवरी 2020 में सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ अपील दाखिल की थी. वहीं मार्च 2022 में उन्होंने सजा निलंबित करने की याचिका भी दायर की थी.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag