ओमान वार्ता के ठीक बाद US का बड़ा धमाका: ईरान के शैडो फ्लीट पर नए सैंक्शन, तेहरान बोला- भरोसे की कमी सबसे बड़ी रुकावट
ईरान-अमेरिका के बीच दशकों पुराना न्यूक्लियर विवाद सुलझाने की उम्मीद जगी है. ओमान की राजधानी मस्कट में हुई खास बातचीत को ईरान ने काफी सकारात्मक कहा है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे शानदार शुरुआत बताया. दोनों पक्षों ने खुले मन से अपनी बातें रखीं और आगे वार्ता जारी रखने पर पूरी सहमति बनी.

नई दिल्ली: ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद को सुलझाने के लिए हुई अप्रत्यक्ष बातचीत को ईरान ने सकारात्मक कदम बताया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस वार्ता को अच्छी शुरुआत बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने आगे की बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है. ओमान की मध्यस्थता में हुई इस मीटिंग में दोनों देशों ने अपने-अपने विचार खुले मन से साझा किए, हालांकि भरोसे की कमी अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
दूसरी ओर, बातचीत के बावजूद अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा कर दी, जिससे डिप्लोमेटिक प्रक्रिया में जटिलता बढ़ गई है. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह धमकी और दबाव की स्थिति में किसी भी संवाद को आगे नहीं बढ़ाएगा और केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर ही चर्चा करेगा.
खुले विचारों का आदान-प्रदान
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि मस्कट में हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने अपने विचार खुले तौर पर साझा किए. उन्होंने कहा कि आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देशों के नेगोशिएटर अपनी-अपनी राजधानियों में सलाह-मशविरा कर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं. अराघची ने भरोसे की कमी को इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी बाधा बताया और कहा कि बिना विश्वास के ठोस परिणाम हासिल करना बेहद मुश्किल होगा.
ईरान का सख्त रुख
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो-टूक शब्दों में कहा कि किसी भी संवाद के लिए धमकी और दबाव से दूर रहना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ और सिर्फ अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम तक सीमित रखेगा. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्ती से कहा है कि बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय गतिविधियां या कोई अन्य मुद्दा इनमें से किसी पर भी चर्चा की कोई गुंजाइश नहीं करती और यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग करता है.
ओमान की मध्यस्थता
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने इस बैठक के बारे में कहा कि ये बैठक बेहद गंभीर रही. उन्होंने बताया कि बातचीत के नतीजों पर तेहरान और वॉशिंगटन विचार करेगा और आगे की बैठक पर फिर विचार किया जा सकता है. ओमान ने दोनों पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां सीधे संवाद की बजाय अप्रत्यक्ष तरीके से चर्चा हुई.
अमेरिका के नए प्रतिबंध
ओमान में वार्ता चल रही थी, उसी दौरान अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया. शुक्रवार को अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के अवैध व्यापार से जुड़ी 15 संस्थाओं और 14 शैडो-फ्लीट जहाजों पर प्रतिबंध लगाए.
मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह की चर्चा नहीं करेगा. अमेरिका के लिए ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम एक रेड लाइन बना हुआ है. क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी ने ईरान की चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
पिछले साल जून में इजरायल के सैन्य अभियान के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने अपना यूरेनियम संवर्धन अस्थायी रूप से रोक दिया था. ऐसे जटिल माहौल में मस्कट की यह अप्रत्यक्ष वार्ता दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.


