युद्धविराम प्रस्ताव पर विचार कर रहा ईरान, लेकिन होर्मुज खोलने से साफ इनकार

ईरान ने पाकिस्तान के सीजफायर प्रस्ताव पर विचार करने के संकेत दिए हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने से साफ इनकार कर दिया है. इस मुद्दे पर अड़े रहने से संभावित समझौते की राह मुश्किल होती नजर आ रही है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है. पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए सीजफायर प्रस्ताव पर ईरान विचार कर रहा है, लेकिन समझौते के सबसे अहम बिंदु पर अब भी गतिरोध बना हुआ है.

दरअसल, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के बदले किसी अस्थायी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में यह मुद्दा संभावित समझौते की राह में सबसे बड़ी अड़चन बनता दिख रहा है.

पाकिस्तान के प्रस्ताव पर विचार, लेकिन शर्तों पर अड़ गया ईरान

ईरानी अधिकारियों ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम का प्रस्ताव मिला है, जिस पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी सीजफायर के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए वह तैयार नहीं है.

ईरान का मानना है कि इस अहम समुद्री मार्ग को खोलना एक बड़े और स्थायी समझौते का हिस्सा होना चाहिए, न कि अस्थायी समाधान का.

दबाव में नहीं होगा युद्धविराम: ईरान

ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि तेहरान पर किसी तरह का दबाव या समयसीमा थोपकर युद्धविराम नहीं कराया जा सकता. उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी रणनीति कारगर नहीं होगी.

ईरान का रुख साफ है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में आकर निर्णय नहीं लेगा.

अमेरिका की मंशा पर जताया संदेह

ईरान ने यह भी कहा कि उसे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका स्थायी युद्धविराम को लेकर गंभीर नहीं है. इसी वजह से वह अस्थायी समझौते के तहत कोई बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है.

यह बयान दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी को भी दर्शाता है.

दो चरणों में सीजफायर का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में दो चरणों में युद्धविराम लागू करने की योजना है. पहले चरण में दोनों पक्ष तुरंत सीजफायर की घोषणा करेंगे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दिया जाएगा.

इसके बाद 15 से 20 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की बात कही गई है.

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका अहम बताई जा रही है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति वैंस, दूत विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ अलग-अलग स्तर पर बातचीत की है, ताकि युद्धविराम की दिशा में प्रगति हो सके.

समझौते में क्या हो सकता है शामिल

अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इसमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत और जब्त की गई संपत्तियों की वापसी जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं.

फिलहाल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी असहमति इस संभावित समझौते की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

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