विंटर ओलंपिक्स 2026 के मेडल से खिलाड़ी होंगे मालामाल, 130 सालों के इतिहास का मिलेगा सबसे महंगा पदक

विंटर ओलंपिक्स 2026 की शुरुआत हो चुकी है. इस बार खिलाड़ियों को मिलने वाले मेडल बेहद खास और महंगा होने वाला है. 130 सालों का इतिहास तोड़ सबसे महंगा पदक मिलेगा.

Sonee Srivastav

Winter Olympics 2026: इटली के मिलान-कोर्टिना में 6 फरवरी से विंटर ओलंपिक्स 2026 की शुरुआत हो चुकी है. स्कीइंग, आइस हॉकी, फिगर स्केटिंग, कर्लिंग जैसे रोमांचक खेलों में दुनिया भर के एथलीट्स हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इस बार सभी की नजरें मेडलों पर टिकी हैं.

आयोजकों ने बताया कि 700 से ज्यादा गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल दिए जाएंगे. ये मेडल न सिर्फ सम्मान के प्रतीक हैं, बल्कि बाजार में इनकी कीमत भी अब तक की सबसे ज्यादा है.

कीमतों में भारी उछाल का कारण

130 साल के ओलंपिक इतिहास में पहली बार मेडल इतने महंगे हुए हैं. मुख्य वजह सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है. पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद से सोने की कीमत में करीब 107 प्रतिशत और चांदी में 200 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है.

वैश्विक बाजार में सोना अब लगभग 4,900-5,000 डॉलर प्रति औंस और चांदी 75-80 डॉलर प्रति औंस के आसपास चल रही है. इससे मेडलों का मटेरियल वैल्यू रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. 

गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल की मौजूदा कीमत

वर्तमान बाजार दरों के अनुसार, गोल्ड मेडल की कीमत लगभग 2,300 डॉलर (करीब 1.9-2 लाख रुपये) तक पहुंच गई है. यह पेरिस 2024 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है, जहां यह करीब 900-1,000 डॉलर थी।.सिल्वर मेडल अब लगभग 1,400 डॉलर (करीब 1.15 लाख रुपये) का है, जो तीन गुना बढ़ गया है. 

ब्रॉन्ज मेडल तांबे से बना होता है, जिसकी कीमत सिर्फ 5-6 डॉलर के आसपास रहती है. ये आंकड़े धातु की स्पॉट प्राइस पर आधारित हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव से बदल सकते हैं.

कैसे बने होते हैं ओलंपिक मेडल?

ओलंपिक गोल्ड मेडल शुद्ध सोने का नहीं होता. इसमें सिर्फ 6 ग्राम शुद्ध सोना प्लेटिंग के रूप में होता है, बाकी 500 ग्राम के करीब चांदी से बना होता है. कुल वजन 506 ग्राम होता है. सिल्वर मेडल पूरी तरह चांदी का और ब्रॉन्ज मेडल तांबे का होता है. 1912 के बाद से गोल्ड मेडल शुद्ध सोने के नहीं बनते. फिर भी धातु की बढ़ती कीमतों ने इनकी वैल्यू को इतिहास की सबसे ऊंची पहुंचा दी है.

मेडल की असली कीमत भावनाओं और उपलब्धि में है. ज्यादातर एथलीट इन्हें कभी नहीं बेचते, लेकिन अगर बिक्री हो तो ऐतिहासिक मेडल करोड़ों में जा सकते हैं.

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