तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार, राज्यपाल ने फिर लौटाया विजय का दावा
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है. राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने लगातार दूसरे दिन भी टीवीके प्रमुख विजय को बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जुटाने को कहा है.

नई दिल्ली: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक असमंजस के बीच टीवीके प्रमुख विजय को लगातार दूसरे दिन भी राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से निराशा हाथ लगी. सरकार बनाने का दावा पेश करने पहुंचे विजय को राज्यपाल ने स्पष्ट बहुमत साबित करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करने को कहा.
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय से 118 विधायकों के समर्थन पत्र लाने को कहा है. फिलहाल टीवीके और उसके सहयोगियों के पास बहुमत के लिए जरूरी संख्या से कम विधायक हैं, जिसके चलते शपथ ग्रहण पर स्थिति साफ नहीं हो सकी है.
राज्यपाल ने मांगा 118 विधायकों का समर्थन
सूत्रों के अनुसार, विजय ने गुरुवार को राजभवन पहुंचकर दोबारा सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालांकि राज्यपाल ने उनसे कहा कि पहले वे 118 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ बहुमत साबित करें, उसके बाद ही शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने कहा, "कृपया 118 हस्ताक्षर लेकर आइए. साबित कीजिए कि टीवीके के पास बहुमत है, तभी शपथ ग्रहण हो सकता है."
पहले भी 112 विधायकों के समर्थन के साथ पहुंचे थे विजय
एक दिन पहले भी विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा किया था. उस समय उन्होंने 112 विधायकों के समर्थन की जानकारी दी थी.
कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी टीवीके बहुमत के आंकड़े से पीछे है. सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल से और समय देने की मांग भी की ताकि बाकी समर्थन जुटाया जा सके.
सरकार की स्थिरता को लेकर राज्यपाल सख्त
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल अर्लेकर ने सरकार की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए लिखित समर्थन पत्रों पर जोर दिया है. उनका मानना है कि स्पष्ट बहुमत के बिना सरकार गठन से राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है.
वीसीके प्रमुख ने राज्यपाल से की मांग
विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने राज्यपाल से विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए और बाद में विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए.
भाजपा पर हस्तक्षेप का आरोप
थिरुमावलवन ने भाजपा पर तमिलनाडु की राजनीति में दखल देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “अब भाजपा, यानी अमित शाह और मोदी, तमिलनाडु की राजनीति में दखल दे रहे हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं.”
उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना है, इसलिए उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए.
वाम दलों ने भी उठाए सवाल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने भी राज्यपाल के रुख पर सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि शपथ ग्रहण से पहले बहुमत साबित करने की शर्त रखना उचित नहीं है.
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव
टीवीके ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए डीएमके और एआईएडीएमके के लंबे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी है. हालांकि विजय द्वारा एक सीट छोड़ने के बाद विधानसभा में पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी.
कांग्रेस के साथ गठबंधन के बावजूद टीवीके के पास फिलहाल 112 विधायक हैं, जो बहुमत के आंकड़े से पांच कम हैं.
संविधान में राज्यपाल को विशेष अधिकार
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत राज्यपाल को मुख्यमंत्री नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त है. त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राज्यपाल अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं.
ऐतिहासिक रूप से कई राज्यों में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को पहले सरकार बनाने का अवसर दिया जाता रहा है.


