कौन हैं एस. कीर्तना? 29 साल की उम्र में बनीं तमिलनाडु की सबसे युवा मंत्री, फर्राटेदार हिंदी से भी चर्चा में

तमिलनाडु की राजनीति में 29 वर्षीय एस. कीर्तना ने नया इतिहास रच दिया है. TVK विधायक के तौर पर उन्होंने मंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सबसे युवा मंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया. खास बात यह है कि तमिल-हिंदी विवाद के बीच भी कीर्तना बेहतरीन हिंदी बोलती हैं, जिससे उनकी चर्चा और तेज हो गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

चेन्नई: तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्य की राजनीति में नए दौर की शुरुआत हो चुकी है. विजय कैबिनेट में शामिल हुए 9 मंत्रियों में सबसे ज्यादा चर्चा युवा विधायक एस. कीर्तना की हो रही है, जिन्होंने मात्र 29 साल की उम्र में मंत्री पद की शपथ लेकर नया रिकॉर्ड बना दिया.

शिवकाशी सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं एस. कीर्तना अब तमिलनाडु की सबसे कम उम्र की मंत्री बन गई हैं. कम उम्र में मिली इस बड़ी जिम्मेदारी के साथ-साथ उनकी पहचान फर्राटेदार हिंदी बोलने वाली नेता के तौर पर भी तेजी से उभर रही है.

कहा से दर्ज की बड़ी जीत?

टीवीके की युवा नेता एस. कीर्तना ने पटाखा उद्योग के लिए मशहूर शिवकाशी सीट से चुनाव लड़ा था. उन्होंने इस सीट पर 11 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की. विजय सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद वह कैबिनेट का सबसे युवा चेहरा बन चुकी हैं.

हिंदी बोलने को लेकर भी चर्चा में

एस. कीर्तना का पूरा नाम कीर्तन संपत है. वह कई भाषाओं की जानकारी रखती हैं, लेकिन उनकी हिंदी बोलने की शैली सबसे ज्यादा चर्चा में रही है.

चुनाव प्रचार के दौरान उनके कई इंटरव्यू सामने आए थे, जिनमें वह फराटेदार हिंदी बोलती नजर आई थीं. ऐसे राज्य में जहां हिंदी विरोध की राजनीति लंबे समय से चर्चा का विषय रही है, वहां किसी युवा नेता का सार्वजनिक मंचों पर सहज हिंदी बोलना अलग पहचान बना रहा है.

राजनीति में सलाहकार के तौर पर कर चुकी हैं काम

राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने से पहले एस. कीर्तना राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं. उन्होंने स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल की है. कीर्तना पहले डीएमके नेता एम.के. स्टालिन समेत कई बड़े राजनीतिक नेताओं के साथ भी काम कर चुकी हैं.

कितने साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा?

इस विधानसभा चुनाव में एस. कीर्तना ने शिवकाशी सीट पर करीब 70 वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया. वह इस सीट से जीतने वाली पहली महिला विधायक बनी हैं. इसके साथ ही उन्होंने उस परंपरा को खत्म किया, जहां दशकों से इस सीट पर केवल पुरुष नेताओं का दबदबा रहा था.

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की कोशिश

भाषाई विवादों के बीच भी कीर्तना खुलकर हिंदी बोलती हैं. उनका मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर संवाद और राजनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए हिंदी जानना जरूरी है. टीवीके की विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में भी उनकी यह क्षमता अहम मानी जा रही है.

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