बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के बीच पूर्व पीएम शेख हसीना ने दिया बड़ा बयान, मोहम्मद युनूस को दी बड़ी नसीहत

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने क्रिसमस संदेश में बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पर धार्मिक स्वतंत्रता कुचलने का आरोप लगाया. अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा, हिंदू युवक की हत्या और कमजोर कानून व्यवस्था ने देश में गंभीर मानवाधिकार संकट को उजागर किया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का कड़ा बयान सामने आया है. क्रिसमस के अवसर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में एक अवैध सरकार के चलते सभी धर्मों के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई है.

क्रिसमस संदेश में शेख हसीना का तीखा हमला

शेख हसीना ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान शासन न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों को अपने-अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता से भी वंचित कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि खास तौर पर गैर-मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार अब एक गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुका है.

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार को बताया अमानवीय

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश में ऐसी भयावह घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें लोगों को जिंदा जलाने और पीट-पीटकर मारने जैसे अमानवीय कृत्य किए जा रहे हैं. उन्होंने इसे देश के इतिहास का काला दौर बताते हुए कहा कि आम जनता अब इस अंधकारमय समय को और अधिक सहन नहीं करेगी. शेख हसीना ने विश्वास जताया कि बांग्लादेश के लोग एकजुट होकर इस स्थिति को बदलेंगे.

ईसा मसीह के संदेशों को किया याद

क्रिसमस के मौके पर शेख हसीना ने दुनिया भर के ईसाई समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए ईसा मसीह के विचारों और बलिदान को याद किया. उन्होंने कहा कि ईसा मसीह मानवता के उद्धारक और शांति के प्रतीक थे. उनके संदेशों ने दुनिया को करुणा, प्रेम और न्याय का मार्ग दिखाया. शेख हसीना ने कहा कि आज के समय में, जब हिंसा और नफरत बढ़ रही है, तब ईसा मसीह के विचार पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं.

हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं

शेख हसीना के बयान के बीच बांग्लादेश से एक और हिंसक घटना सामने आई है. गुरुवार रात राजबारी जिले के पांग्शा उपज़िला में एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. यह घटना कालीमोहर यूनियन के होसेनडांगा गांव में रात करीब 11 बजे हुई.

जबरन वसूली के आरोप में युवक की मौत

पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है, जो उसी गांव का निवासी था. आरोप है कि भीड़ ने उस पर जबरन वसूली का आरोप लगाकर हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हालांकि, पुलिस अब मृतक को ही अपराधी बताने की कोशिश कर रही है, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदायों में नाराजगी देखी जा रही है.

पुलिस कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

सहायक पुलिस अधीक्षक देब्रता सरकार ने घटना की पुष्टि करते हुए जांच की बात कही है, लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने कानून व्यवस्था और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में अक्सर पीड़ितों को ही दोषी ठहरा दिया जाता है.

मानवाधिकारों का सवाल

लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है. ऐसे में शेख हसीना का बयान बेहद अहम माना जा रहा है. यह बयान न केवल मौजूदा सरकार के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति और सामाजिक हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.

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